लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। नेपाल में दस हजार रुपये जुर्माना भरकर लौटे सीएचसी अधीक्षक सुशील कुमार समेत तीन कर्मियों से सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल ने पूछा है, डॉक्टर साहब-आठ दिन से किस लोक की सैर कर रहे थे। इस बाबत सीएमओ ने तीन दिन में स्पष्टीकरण तलब किया है। इधर डॉक्टरों की रिहाई से जहां उनके परिवारीजनों और साथियों में खुशी है, वहीं उनका हाल जानने के लिए मंगलवार को सीएचसी में उनके मिलने वालों का तांता लगा रहा।
जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बांकेगंज में तैनात अधीक्षक सुशील कुमार, मेडिकल ऑफीसर डॉ. सावंत राव स्वामी और संविदा फार्मासिस्ट धर्मवीर ही नेपाल पुलिस की हिरासत में थे। मंगलवार को तीनों सीएचसी पहुंचे। अधीक्षक डॉ. सुशील कुमार ने सीएमओ को अस्पताल पहुंचने की जानकारी दी। इस पर सीएमओ ने पूछा, आठ दिन से किस लोक की सैर कर रहे थे? डॉक्टर ने अपनी सफाई देनी चाहिए, लेकिन सीएमओ ने रोक दिया। कहा, मौज मस्ती कर चुके हो तो अब काम करो। लिखित स्पष्टीकरण के लिए पत्र भेज रहा हूं। तीन दिन में अपना सही जवाब दे देना। सीएमओ ने तीनों से विभागीय कार्रवाई झेलने के लिए तैयार रहने को कहा है। इधर तीनों ने अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है।
अनुपस्थिति के दिनों का नहीं मिलेगा वेतन
सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल ने कहा है कि बांकेगंज की सीएचसी अधीक्षक और उनके सहयोगी डॉक्टर व संविदा फार्मासिस्ट ने कार्यभार संभाल लिया है। अभी स्पष्टीकरण नहीं मिला है, लेकिन नेपाल में यही तीनों हिरासत में थे। तीनों का स्पष्टीकरण मिलने के बाद संपूर्ण रिपोर्ट विभाग को भेजी जाएगी। साथ ही सीएमओ ने बताया कि तीनों लोग 18 से 25 फरवरी तक अनुपस्थित रहे हैं। जांच होने और विभागीय निर्देश मिलने तक अनुपस्थित अवधि का तीनों को वेतन नहीं मिलेगा।
डॉक्टर बोले, नेपाल में नहीं होती भारतीय की सुनवाई
बांकेगंज। नेपाल पुलिस की हिरासत से लौटे डॉक्टर और फार्मासिस्ट अपने साथ हुए अन्याय को लेकर काफी क्षुब्ध हैं। प्रभारी अधीक्षक डॉ. सुशील कुमार कहते हैं नेपाल जाने वाला नहीं है। 17 फरवरी को वह नेपाल में हो रहे नेपाल महोत्सव में गए थे। बार्डर से बैटरी रिक्शा चालक ने 150 रुपये लिए थे, लेकिन रात जब लौटे तो रिक्शा वाला छह सौ रुपये से एक रुपया कम न लेने पर अड़ गया। इस पर उसे दिन की बात बताई और जैसे बताया कि बहुत बार नेपाल आ चुका हूं। वह भड़क गया और झगड़े पर आमादा हो गया। बचाव में उसे रोकने की कोशिश की तो उसके अन्य साथी आ गए, तभी पुलिस आ गई। डांस बार में झगड़े की बात और शराब बरामदगी पर कहते हैं कि वह डांस बार नहीं जानते और न ही कभी गए हैं। शराब की बोतल नेपाल महोत्सव से लौटते खरीदी थी। पुलिस ने बढ़ाचढ़ाकर आरोप मढ़े थे। फिलहाल नेपाल की पुलिस किसी भी भारतीय की नहीं सुनती है।
डॉ. सावंत बोले, मात्र एक मिनट ही मिलने देते थे
डॉ. सामंतराव सामी ने बताया कि पुलिस हिरासत में उन्हें परिवार के किसी मेंबर से मात्र एक मिनट की मुलाकात कराई जाती थी। फार्मासिस्ट धरमवीर ने बताया कि उनके पिताजी जब प्रहरी कार्यालय में मुलाकात करने गए तो वहां की पुलिस ने कमरे का हल्का शीशा हटाकर पिता को हमारी शक्ल दिखाने के बाद खिड़की बंद कर दी। पिता के काफी अनुरोध के बाद भी नेपाल पुलिस ने उन्हें बात करने की इजाजत नहीं दी।