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पार्टी नहीं, व्यक्तिगत संबंधों को भी मिला समर्थन

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लखीमपुर खीरी।
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नगर निकाय चुनाव में सभी प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, जिसमें बसपा ने पहली बार चुनाव लड़ाया था। चौंकाने वाले नतीजों ने मतदाताओं के रुख को स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने पार्टी से अलग हटकर व्यक्तिगत तौर पर निर्दलीय प्रत्याशियों को महत्व दिया है। यही वजह है कि गोला नगर पालिका, नगर पंचायत मैलानी, ओयल और बरवर की सीटें निर्दलियों के खाते में गई हैं।
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इसी वर्ष हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने आठों सीट पर जीत का परचम लहराया था, जिससे नगर निकाय चुनाव में भी भाजपाई प्रदर्शन दोहराने की उम्मीद कर रहे थे, जबकि कांग्रेस, सपा और बसपा ने खोई हुई जमीन को हासिल करने के लिए नगर निकाय चुनाव में जोर लगाया था। चार नगर पालिका और छह नगर पंचायतों के परिणामों से भाजपा को चार सीटों पर कामयाबी जरूर मिली है, लेकिन जीत का अंतर कम रहा है। सपा और कांग्रेस के खाते में एक-एक सीट आई है, लेकिन बसपा खाता नहीं खोल सकी है। वजह रही निर्दलीय उम्मीदवारों ने दमखम से चुनाव लड़ा और चार सीटों पर कब्जा जमाया। गोला नगर पालिका सीट पर कांटे का मुकाबला माना जा रहा था, लेकिन मतदाताओं ने निर्दलीय मीनाक्षी अग्रवाल पर भरोसा जताते हुए उन्हें भारी अंतर से जिला दिया, जबकि उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने भाजपा प्रत्याशी विजय शुक्ला उर्फ रिंकू के पक्ष जनसभा की थी, लेकिन मतदाताओं ने निवर्तमान अध्यक्ष मीनाक्षी पर विश्वास जताया। मीनाक्षी की जीत के पीछे जनता से सीधा जुड़ाव महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। इसी तरह मैलानी नगर पंचायत से निर्दलीय सत्यवती, बरवर से निर्दलीय नसरीन बानो और ओयल से निर्दलीय प्रदीप गुप्ता उर्फ सोनू को मिली जीत ने राजनीतिक पंडितों के दावों और गणित को फेल कर दिया है। मतदाताओं के इस रुख से भाजपा, सपा, बसपा के नेता जरूर हैरान होंगे और जनता के मूड को नए सिरे से समझने की कोशिश करेंगे। वहीं जनता ने अपने निर्णय से लोकतंत्र को मजबूती दी है, जिसका संदेश है कि पार्टी-दलगत राजनीति से हटकर भी फैसले लिए जा सकते हैं।
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