बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में कोर जोन के बाद अब बफरजोन में भी घास के मैदानों के वैज्ञानिक प्रबंधन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। फाटा प्रबंधन के पहले चरण में बफरजोन की मैलानी और भीरा रेंज के सात घास के मैदानों को प्रबंधन के लिए चुना गया है। फाटा प्रबंधन की प्रक्रिया बारिश के मौसम से ही शुरू कर दी जाएगी।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए चयनित मैलानी और भीरा रेंजों के सात घास के मैदानों में उगने वाली घास का गहन अध्ययन कर उपयोगी और अनुपयोगी घासों को चिह्नित किया जाएगा। बारिश के मौसम में सभी प्रकार की घासें तेजी से उगती और बढ़ती हैं। ऐसे में इन घासों के अध्ययन में सहूलियत होगी।
उन्होंने बताया कि बारिश के तुरंत बाद घास के मैदानों में जो हानिकारक और अनुपयोगी घासें हैं उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी। जबकि उपयोगी घासों के विस्तार में आने वाली बाधाओं को दूर किया जाएगा। घास के मैदानों के वैज्ञानिक प्रबंधन को चरणबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए प्रत्येक घास के मैदान के कई-कई प्लाट बनाए जाएंगे, और विशेषज्ञों के सुझाव के मुताबिक उनका वैज्ञानिक प्रबंधन होगा।
मालूम हो कि पिछले साल दुधवा मुख्यालय पर हुई तीन दिवसीय फाटा प्रबंधन कार्यशाला में विशेषज्ञों ने घास के मैदानों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर बल दिया था। उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए थे, जिन पर अमल शुरू कर दिया गया है। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक ने बताया कि घास के मैदानों के वैज्ञानिक प्रबंधन से यहां के वन्यजीवों की खाद्य श्रंखला अनुकूल होगी। इससे बफरजोन में शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीवों की आबादी में तेजी से बढ़ोतरी हो सकेगी।