धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। ब्लाक क्षेत्र की बबुरी नरूपुर गोशाला में सोमवार तड़प-तड़पकर पांच गायें मरने की खबर छपने के बाद अधिकारियों ने कागजी खानापूरी तो खूब की, लेकिन मौके पर कोई नहीं पहुंचा। नतीजा यह हुआ कि इसी गोशाला में मंगलवार को दो और गायें मर गईं। पांच और गायें मरणासन्न हालत में हैं। वहीं सोमवार की मरी पांच गायों के शवों को रातों रात गायब कर दिया गया, हालांकि बाद में एक का शव नाले के पास पड़ा मिल गया।
अमर उजाला टीम ने सोमवार को नरूपुर गौशाला की पड़ताल की तो पांच गाएं मृत मिलीं थीं। मंगलवार को पांच में से चार शव गायब मिलीं, जबकि एक शव नाले में पड़ा मिला। हालांकि इस बाबत मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. टीके तिवारी का कहना है कि मृत गायों का पंचनामा भरवाकर उन्हें दफन कर दिया गया है। हालांकि पांचवीं गाय के नाले में पड़े होने की बाबत वह कुछ भी नहीं बता पाए। इस बीच पांच गायों के मरने के बाबत छपी खबर पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) डॉ. टीके तिवारी ने धौरहरा के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश गुप्ता का स्पष्टीकरण तलब कर लिया, जबकि डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने पूरे मामले की रिपोर्ट एसडीएम धौरहरा आशीष मिश्रा से तलब की। हालांकि एसडीएम तो मौके पर नहीं पहुंचे, लेकिन बीडीओ धौरहरा भीमजी उपाध्याय ने गोशाला का निरीक्षण कर यहां के कर्मचारियों और डॉक्टर के बयान लिए। अधिकारियों ने यह खानापूरी तो की, लेकिन गोवंश की जिंदगी बचाने की कोई कवायद दूसरे दिन भी नहीं की। इससे दो गाय और मर गईं, वहीं पांच मरणासन्न गायों की भी बचने की कोई उम्मीद नहीं रह गई है।
दो सौ की क्षमता, रख दिए 780 गोवंशीय पशु
लावारिस गोवंशीय पशुओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जितना गंभीर हैं, वहीं अधिकारी इसमें खानापूरी करने में लगे हैं। शायद यही वजह है कि ग्राम पंचायत बबुरी नरूपुर में चार हेक्टेअर जमीन पर बनी गौशाला में मुश्किल से दो सौ गोवंशीय पशु रखने की क्षमता है, जबकि यहां 780 गोवंशीय पशुओं को रख दिया गया। कुछ गोवंशीय पशु मर गए, जबकि कुछ भाग निकले। वर्तमान में यहां 635 गोवंशीय पशु हैं। जिनकी देखरख के लिए 14 लोग कार्यरत हैं। हालांकि बीडीओ भीमजी उपाध्याय का कहना है कि तीन सौ गोवंशीय पशुओं को रखने की इसकी क्षमता है। इन गायों के रहने और चारा की व्यवस्था की जिम्मेदारी ब्लाक के बीडीओ को दी गई है। जबकि पशु चिकित्सा विभाग को पशुओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
गोशाला में कई गोवंशीय पशु बीमार हैं, जिनका इलाज बुधवार से नियमित रूप से किया जाएगा। रविवार और सोमवार को पांच गायें मर गईं थीं, जिनको दफन कर दिया गया है। मंगलवार को दो और गाएं मर गई हैं, जिसकी सूचना उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। -भीमजी उपाध्याय, बीडीओ, धौरहरा
गोआश्रय स्थल में काफी गायें लावारिश अवस्था में लाई गई हैं, जिनमें से अनेक बीमार हैं। इनके इलाज के लिए लगातार यहां कैंप लगाने की जरूरत है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे गई है। बुधवार से नियमित इलाज किया जाएगा।
डॉ. मुकेश गुप्ता, पशु चिकित्साधिकारी धौरहरा
गौशाला में पिछले 36 घंटे के अंतराल में सात गायों के मरने की जानकारी है। इस बाबत पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश गुप्ता का जवाब तलब किया गया है। साथ ही बुधवार तक संपूर्ण जांच रिपोर्ट भी मांगी है। गायों की बीमारी से स्वाभाविक मौत हुई है, इसलिए पंचनामा भरकर उन्हें दफन कराया गया है। -टीके तिवारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
गोआश्रय स्थल में अब तक सात गायों के मरने की खबर। मामले की जांच कराई जा रही है। साथ ही गायों के चारे-पानी की व्यवस्था पहले से है। उनके इलाज की भी समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। गोवंशीय पशुओं के मामले में कतई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम