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72 छप्पर राख, 12 लोग झुलसे, 40 मवेशी जिंदा जले

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बिजुआ (लखीमपुर खीरी)। भीरा कोतवाली क्षेत्र के बस्तौली गांव में सोमवार दोपहर आग लगने से करीब 72 छप्पर जलकर राख हो गए। तीन दर्जन से ज्यादा मवेशी जिंदा जल गए। आग पर काबू पाने की कोशिश में 12 लोग झुलस गए। उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया है। सूचना पर एसडीएम गोला और तहसीलदार समेत कई थानों की पुलिस पहुंच गई। वहीं एक परिवार के लोग मासूम बेटे के आग में जल जाने की आशंका से बदहवास हो गए, लेकिन एक घंटे बाद उसे झुलसी अवस्था में पाकर परिजन रो पड़े।
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बस्तौली गांव में दोपहर करीब दो बजे गांव के पश्चिम हिस्से से अचानक आग लगने से आशिक अली का छप्पर जलने लगा। तेज हवा चल रही थी, इससे आग बेकाबू हो गई। देखते ही देखते आग ने अकबर, जहरुद्दीन, संतोष वाल्मीकि, बहार अली, लाडले के छप्परों को अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीण आग की लपटें देखकर मदद को दौड़े। तब तक एक के बाद एक पूरब की तरफ गांव के आखिरी हिस्से तक छप्परों को अपनी चपेट में ले लिया। लोग छप्परों से खाली हाथ निकल सके, लोगों की पूरी गृहस्थी, सिंचाई इंजन, एक बाइक, और आशिक अली का ट्रैक्टर जल गया। उधर, गांव निवासी पट्टे का आठ वर्षीय पोता गुड्डू नजर नहीं आया तो परिवार वाले उसके आग में जल जाने की बात कहकर चीखने लगे। बाद में गुड्डे गांव के बाहर ही रोता बिलखता मिल गया। इस बीच सूचना पर भीरा इंसपेक्टर अनिल कुमार सिंह मौके पर पहुंचे। आग में गांव के शराफत अली एवं उनकी मां, बाबू, सलीना, फरीदा, कासिमा समेत करीब 12 लोग झुलस गए। फरीदा को गंभीर रूप से झुलसने पर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। एसडीएम गोला सुनंदू सुधाकरण ने ग्राम प्रधान अनिल दीक्षित को अग्निपीड़ित परिवारों को भोजन के इंतजाम कराने के निर्देश दिए।

डीएम ने दिए तत्काल सहायता के निर्देश
डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने बस्तौली गांव समेत सभी अग्निकांड से प्रभावित गांवों में तत्काल आर्थिक और जरूरी मदद देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अग्निकांड पीड़ितों को सबसे पहले खाने पीने की वस्तुएं आदि उपलब्ध कराई जाएं। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं मिलनी चाहिए।
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