अब कानून व्यवस्था के लिए संकट बन रहे बाघ
क्रासर......
पुलिस, प्रशासन, वन विभाग की संयुक्त रणनीति जरूरी
क्रासर.......
जंगल में घुसपैठ होने से बाहर आ रहे बाघ और तेंदुए
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। जंगल से बाघ और तेंदुओं का निकलना कानून व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। मोहम्मदी रेंज में बाघ हमले के बाद गुस्साई भीड़ का वन रेंज कार्यालय पर हमला, तोडफ़ोड़ , आगजनी और लूटपाट के बाद पांच वन कर्मियों को बुरी तरह पीटकर घायल कर देने की घटना जहां कानून व्यवस्था के लिए खतरे का संकेत दे रही है वहीं वनकर्मियों का मनोबल भी टूट रहा है। वनकर्मी जहां इस घटना से आहत हैं वहीं उनमें पुलिस की निष्क्रियता से नाराजगी भी है।
पिछले बृहस्पतिवार को दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज में एक बाघ ने अयोध्यापुर निवासी 47 वर्षीय कंधई को हमला कर घायल कर दिया था। इस घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने जो उत्पात किया उससे कानून व्यवस्था पर ही संकट खड़ा हो गया। ग्रामीणों ने लूटपाट, तोड़फोड़ और आगजनी करने के साथ-साथ वन कर्मियों की रायफलें और बंदूकें भी लूट लीं। पुलिस इस मामले में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करना चाहती थी। बाद में काफी दबाव के बाद रिपोर्ट तो दर्ज कर ली लेकिन अभी तक किसी नामजद को भी गिरफ्तार करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। उधर, वनकर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह में गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे इसके खिलाफ हड़ताल पर चले जाएंगे।
इंसेट.......
इससे पहले निघासन में भी हुई थी अराजकता
मोहम्मदी रेंज के पहले निघासन में बाघ हमले में ग्रामीण कामता प्रसाद की बाघ हमले में मौत के बाद अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। गुस्साए ग्रामीणों ने हमला करने वाली बाघिन को ही घेर कर मार डालने की कोशिश की थी। वनकर्मियों और पुलिस ने किसी तरह उसे बचाने में कामयाबी पाई थी। गंभीर हालत में उसे लखनऊ स्थित नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान इलाज के लिए भेजा गया था। इससे पहले महेशपुर में ग्रामीणों ने भाकियू के नेतृत्व में बाघ हमलों के विरोध में धरना प्रदर्शन किया था।
इंसेट......
हर तरफ बाघ का शोर, नहीं चल रहा जोर
मोहम्मदी रेंज में कठिना नदी के किनारे, घमहाघाट, अयोध्यापुर, सुंदरपुर आदि इलाके में बाघ की दहशत है तो मैलानी रेंज के चौधीपुर में तेंदुआ आतंक का पर्याय बना हुआ है। यह तेंदुआ बीस से अधिक बकरियों और एक दर्जन से अधिक कुत्तों को अपना निवाला बना चुका है। शहर से महज पांच सात किलोमीटर की दूरी पर छोटी बन्नी गांव में एक मादा तेंदुआ अपने दो शावकों के साथ चहलकदमी कर रही है। उधर, पलिया क्षेत्र के प्रेम नगर में बाघ की दहाड़ से लोग दहशत में है।
इंसेट.....
जंगल में घुसपैठ और गन्ने की खेती से आवारा हुए बाघ
जंगल के आसपास बसे गांवों के लोग जलौनी लकड़ी, घास फूस, धरती के फूल और कटरुआ आदि के लिए जंगल में घुसपैठ करते हैं, जिससे बाघों के प्राकृतिक आवास में खलल पड़ता है। जंगल से सटकर हो रही गन्ने की खेती के कारण बाघों को कॉरीडोर मिल रहा है, जिसके जरिये बाघ जंगल से निकलकर आबादी के पास तक आ रहे हैं। इंसानों के लिए खतरा बन रहे हैं।
इंसेट.......
यदि पुलिस चेतती तो नहीें होता इतना बवाल
मोहम्मदी रेंज में हुए बवाल के दौरान यदि पुलिस समय से सक्रिय हो जाती तो शायद इतना बड़ा बवाल नहीं होता। महेशपुर स्थित मोहम्मदी रेंज कार्यालय पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर है। इसके बाद भी इतना बड़ा बवाल पुलिस नहीं रोक पाई। और तो और पुलिस ने वनकर्मियों की ओर से रिपोर्ट तक दर्ज करने में हीलाहवाली की। दबाव में आकर रिपोर्ट दर्ज की तो अराजक तत्वों की गिरफ्तारी में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। इससे शरारती तत्वों के हौसले बुलंद हैं।
वर्जन........
मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे रोकने के जंगल पर इंसानी निर्भरता कम करना जरूरी है। बाघों और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता और उनसे बचाव के लिए सतर्कता जरूरी है। वन विभाग लगातार इस दिशा में प्रयास कर रहा है कि मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति न पैदा हो।
डॉ. अनिल कुमार पटेल
उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन।