सुंदरपुर में दुर्गा मंदिर पर फिर दिखा बाघ, ग्रामीणों में दहशत
- सोमवार को इसी क्षेत्र में किसान को बनाया था निवाला
अमर उजाला ब्यूरो
ममरी। सोमवार सुबह सुंदरपुर निवासी 35 वर्षीय बालकराम पर हमला कर मौत के घाट उतारने वाला बाघ अब तक गन्ने के खेतों में ही अपना ठिकाना बनाए हुए है। मंगलवार सुबह वही बाघ सुंदरपुर गांव के नजदीक दुर्गा माता मंदिर के पास गन्ने के खेत में छिपा देखा गया, जिससे गांव वालों में दहशत व्याप्त है। रेंजर एसएन यादव का कहना है कि बाघ की निगरानी के लिए वनकर्मियों की टीम मौके पर भेजी गई है, जबकि गांव वालों का कहना है कि रेंजर झूठ बोल रहे हैं। गांव के आसपास कहीं कोई टीम नहीं है।
सोमवार सुबह कठिनानदी से सटे खेत पर गन्ने की सिंचाई करने गए गांव सुंदरपुर के 35 वर्षीय बालकराम को बाघ ने हमला कर मार डाला था, जिससे गुस्साए गांव वालों ने जमकर हंगामा भी किया था। ग्रामीणों के अनुसार बाघ अब तक अपना ठिकाना गन्ने के खेतों में बनाए हुए है। प्रधान रामबिलास चौधरी, बीडीसी रामकुमार वर्मा, सत्यपाल वर्मा, बाबूराम वर्मा, सुनील वर्मा, लाल सिंह, रामस्वरूप आदि ने बताया कि मंगलवार की सुबह गांव के जितेंद्र, सर्वेश कुमार के खेत की ओर जा रहे थे, इसी बीच उन्हें दुर्गा मंदिर से सटे खेत में बाघ चहलकदमी करता दिखाई पड़ा। दोनों युवकों ने भाग कर अपनी जान बचाई और गांववालों ने सूचना वनकर्मियों को दी। रामकुमार वर्मा का कहना है कि बाघ के मौजूद होने की सूचना रेंजर को दिए जाने के बाद कोई वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा, जबकि रेंजर का कहना है कि बाघ की निगरानी के लिए वनकर्मियों की टीम मौके पर भेजी गई है। रेंजर का कहना है कि फारेस्टगार्ड ओपी वर्मा पर जानलेवा हमला होने के कारण वनकर्मी वहां जाने से घबरा रहे हैं।
सबसे अहम विषय तो यह है कि एक तरफ गांव वाले बाघ के हो रहे हमलों से भयभीत हैं उन्होंने खेतों की ओर जाना बंद कर दिया है, जिनकी खेती बाघ की दहशत से चौपट हो रही है, जिससे गांव वालों में आक्रोश है। दूसरी तरफ वनकर्मी आक्रोशित गांव वालों से भयभीत हैं जो फोरेस्टर ओपी वर्मा पर हुए जानलेवा हमले की वजह से गांव जाने से घबरा रहे हैं। गांव वालों ने रेंजर पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है।
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बालकराम के शव का हुआ अंतिम संस्कार
सोमवार को बाघ के हमले में मारे गए गांव सुंदरपुर निवासी बालकराम का शव जैसे ही पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचा वैसे ही वहां गांव वालों की भीड़ जमा हो गई। गांव वाले बालकराम की हुई मौत के लिए वन विभाग को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। उनका कहना है कि वनकर्मी यदि लापरवाही न बरतते तो शायद बालकराम की जान बच सकती थी। परिवार वालों ने मंगलवार को सवेरे मृतक के शव का दाह संस्कार कर दिया है, जिसकी शवयात्रा में तमाम लोग मौजूद रहे।