जैन मुनि ने दिया सुखमय जीवन जीने का मंत्र
अमर उजाला ब्यूरो
तिकुनिया।
दुख में तड़पें नहीं सुख में फूलें नहीं, प्राण जाएं पर धर्म भूले नहीं। इन पंक्तियों के साथ जैन संत रोहित मुनि और श्रेयांश मुनि ने अपने तिकुनिया प्रवास के दौरान लोगों को सुखमय जीवन जीने का मंत्र दिया। जैन समाज की ओर से पं. शिव चरण शर्मा ने संतों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जिस घर में माता-पिता का आदर होता है उस घर में कभी भी आपदा नहीं आती। जिस नगर में संतों का आगमन होता उस नगर पर कभी संकट नहीं आता।
पलिया निवासी निरंजन अग्रवाल ने गुरु महिमा का बखान करते हुए कहा कि गुरुओं का आना ही अपने आप में वरदान है। अध्यापक राम निवास जायसवाल ने कहा कि गुरु की महिमा इतनी विशाल है कि उसे शब्दों में नहीं लिखा जा सकता। इसके बाद संतों के स्वागत गीतों की शुरू हुई श्रंखला में नवीन जैन ने भजन गुरुवर पधारो हृदय में विराजो पेश किया। मोनिका जैन और रति जैन ने गुरुदेव तुम्हें अर्पण श्रद्धा के सुमन मेरे, संजय जैन ने आज मेरी नगरी में देवता पधारे हैं भजन पेश किया। पद्म महावर ने भजन तू प्यार का सागर है तेरी इक बूंद के प्यासे हम गाकर माहौल को भावुक कर दिया।
इससे पहले जैन संत सुबह साढ़े सात बजे ग्राम बनवीरपुर निवासी नीरज तिवारी के आवास से पद यात्रा कर करीब पौने नौ बजे तिकुनिया स्थित जैन स्थान पहुंचे। जहां शिव चरण शर्मा, राम अवतार अग्रवाल, विजेंद्र जैन, चांद कुमार जैन, निरंजन अग्रवाल, जगदीश महावर, पंकज तिवारी, राजकुमार गोयल, अजय गर्ग टीटू, पदम अग्रवाल, अनिल महावर, प्रवीन गोयल, प्रेम अग्रवाल, जगदीश अग्रवाल, जयदेव अग्रवाल, संजय जैन, प्रेमचंद्र जैन, केदारनाथ अग्रवाल आदि ने उनका स्वागत किया।