इमलिया व नानक फार्म में बाघ की दहशत, पगचिह्न दिखे
पलियाकलां। भीरा क्षेत्र के जगदेवपुर ग्राम पंचायत के इमलिया व नानक फार्म में बाघ दिखने से ग्रामीणों में दहशत है। वन विभाग ने भी अकेले खेतों की तरफ जाने से ग्रामीणों को मना किया है।
नानक फार्म में पिछले दिनों बाघ ने गाय को निवाला बना लिया था। इसके बाद से यहां के ग्रामीणों में बाघ को लेकर दहशत है। खौफ का यह आलम है कि ग्रामीण अपने खेतों की तरफ जाने से कतराने लगे हैं। नानक फार्म के अतेन्द्र, शामी, अमोलक सिंह, जसकरन, गगन आदि ने बताया कि खेतों की तरफ जाने से डर लगने लगा है। समूह बनाकर खेतों की तरफ ग्रामीण जा रहे हैं। खड़े गन्ने में कहां से बाघ हमला कर दे यह उनको खुद ही नहीं मालूम है जिसके कारण ग्रामीणों में दहशत फैली हुई है। उधर इमलिया फार्म में भी बाघ की चहलकदमी बनी हुई है। यहां के ग्रामीण भी बाघ के डर से खेतों में अकेले नहीं जा रहे हैं। गन्ने के खेतों में बाघ के पगचिह्न भी दिखाई दिए हैं, जिससे ग्रामीण भयभीत हैं।
अब एसटीपीएफ के जवान करेंगे बाघों की सुरक्षा
शिकारियों की गिरफ्तारी के बाद हरकत में आया महकमा
महेशापुर गांव के आसपास तैनात
अमर उजाला ब्यूरों
बांकेगंज। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पूरनपुर जंगल की महोफ रेंज में बाघ के चार दांतों सहित भीरा रेंज से सटे महेशापुर गांव निवासी दो शिकारियों के गिरफ्तार होने के बाद हरकत में आए वन विभाग ने बाघों की सुरक्षा के लिए महेशापुर गांव के आसपास एसटीपीएफ के जवानों की तैनाती की है। आधुनिक हथियारों से लैस एसटीपीएफ के यह जवान चौबीस घंटे बारी-बारी से जंगल के बाहरी किनारों और गन्ने खेतों में पहुंचने वाले बाघ और तेंदुओं की निगरानी करेंगे।
मालूम हो कि डीटीआर और पीटीआर की संयुक्त टीम ने पूरनपुर जंगल की महोफ रेंज से मंगलवार रात दो शिकारियों को बाघ के चार दांतों के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान पकड़े गए दोनों शिकारियों ने उनके पास से बरामद बाघ के दांत डीटीआर बफरजोन के भीरा रेंज जंगल से लाने की बात स्वीकारी थी। साथ ही वनाधिकारियों से इस मामले में दो और लोगों के शामिल होने की बात बताई। चारों शिकारी भीरा रेंज जंगल से सटे गांव महेशापुर निवासी हैं। इसके अलावा इस अपराध में शामिल इसी गांव के दो अन्य शिकारी फरार चल रहे हैं। इसमें एक शिकारी का पिता भी बाघ के शिकार का आरोपी रहा है। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन उप-निदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल ने बताया कि भीरा रेंज के महेशापुर गांव निवासी चारों शिकारी गांव छोड़कर दूसरी जगहों पर रह रहे हैं, जबकि पत्नी और बच्चे गांव में ही रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि चारों शिकारी बाहर रहने के बावजूद गांव में आते-जाते रहते हैं। चारों शातिर शिकारी मौका पाकर वन्यजीवों का शिकार करने की फिराक में रहते हैं। डीटीआर बफरजोन डीडी डॉ अनिल कुमार पटेल ने बताया कि बाघ, तेंदुए और अन्य शाकाहारी एवं मांसाहारी वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर भीरा जंगल से घिरे महेशापुर गांव के आसपास शुक्रवार से एसटीपीएफ जवानों को तैनात किया गया है।
फरार शिकारियों की तलाश में दबिश
डीडी डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि पीटीआर के पूरनपुर जंगल से बाघ / तेंदुए के चार दांतों के साथ गिरफ्तार हुए महेशापुर गांव निवासी दाताराम एवं जसवंत के अलावा अपराध में शामिल इसी गांव के दो अन्य आरोपी फरार चल रहे हैं। साथ ही मैलानी रेंज की गढ़ा बीट मेें एक शिकारी के पकड़े जाने के बाद पीलीभीत जिले के सेहरामऊ थाना क्षेत्र निवासी चार फरार आरोपी फरार हैं। शिकारियों की गिरफ्तारी के लिए वन विभाग की टीमें गठित की गईं हैं। फरार शिकारियों की गिरफ्तारी के लिए गठित टीमें उनके संबंधित ठिकानों पर दबिशें दे रही हैं, लेकिन शिकारी वन विभाग के हत्थे नहीं चढ़ पाए हैं। जिनकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि पांचों फरार आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।