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युवक पर झपटा तेंदुआ, बमुश्किल बची जान
अब तक छह कुत्ता और 15 बकरियों को बना चुका निवाला
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज (लखीमपुरी खीरी)। गन्ने के खेत की रखवाली करने जा रहे एक युवक पर तेंदुआ झपट पड़ा। शोर मचाते हुए किसी तरह उसने अपनी जान बचाई। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों ने गन्ने के खेत में पगचिह्न देखकर तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि की है।
बांकेगंज से तीन किलोमीटर दूर स्थित चौधीपुर गांव निवासी 30 वर्षीय मुकेश सोमवार सुबह गन्ने की फसल देखने जा रहा था। इस दौरान खारजा नाले पर बैठकर वह लघुशंका करने लगा। जहां झाड़ियों में छुपा बैठा तेंदुआ उस पर झपट पड़ा। मुकेश जोर-जोर से शोर मचाता हुआ भाग खड़ा हुआ। इसी बीच आसपास के कई लोग आ गए और शोर मचाने लगे। इससे तेंदुआ कुछ दूर जाकर गन्ने के खेत में घुस गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। मौके पर पहुंचे मैलानी रेंज फॉरेस्टर मोहम्मद उमर, सुखपाल सिंह और राजेंद्र वर्मा ने पगचिह्न देखकर उस जगह पर तेंदुआ की मौजूदगी की पुष्टि की है।
मालूम हो कि करीब एक माह से जंगल से आबादी की ओर निकला तेंदुआ आधा दर्जन पालतू कुत्तों और 15 बकरियों को अपना निवाला बना चुका है। वन विभाग इसकी निगरानी करने के अलावा आबादी क्षेत्र में गतिविधियों को रोक नहीं पा रहा है। इस बाबत बफरजोन उप-निदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि मैलानी रेंज के चौधीपुर गांव के निकट एक युवक पर तेंदुए के झपटने की सुचना मिली है। वन कर्मियों की टीम को तेंदुए की निगरानी के लिए लगाया गया है।
बाघ के पगचिह्न दिखने से ग्रामीणों में दहशत
ममरी (लखीमपुरी खीरी)। महेशपुर रेंज के जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों में पहुंचे बाघ के पगचिह्न देख क्षेत्रवासियों में दहशत है। लोग पशुओं के लिए चारा लेने खेतों की ओर जाने से घबरा रहे हैं। वहीं वनकर्मियों ने इसे अफवाह बताया है।
नयागांव, अशर्फीगंज, कन्हैयागंज, बिहारीपुर, तूलमेलगंज के ग्रामीणों की माने तो 31 अगस्त को बाघ गन्ने के खेतों में विचरण करते हुए जंगल से तीन किमी दूर अशर्फीगंज और कन्हैयागंज गांव आबादी के बीच जा पहुंचा। जिसके पगचिह्न कच्चे रास्ते पर मिले थे। तभी से बाघ अपना ठिकाना गन्ने के खेतों में बनाए है। गांव वालों के अनुसार शनिवार को बाघ जंगल से नीलगाय का पीछा करतेे देखा गया। जिससे ग्रामीण पशुओं के लिए घास, चरी काटने नहीं जा रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले साल 21 अक्तूबर को खेत से गन्ने की पत्ती तोड़ने गए अशर्फीगंज के युवक लालाराम को बाघ ने हमला कर मार डाला था, इसी दशहत में वह खेतों की ओर नहीं जा रहे हैं।
वन दरोग राजेश, वनरक्षक श्यामकिशोर शुक्ला आदि ने इसे अफवाह बताया है। उनका कहना है कि 31 अगस्त को बाघ रास्ता भटक कर अशर्फीगंज गांव के पास जा पहुंचा था, जिसके पगचिह्न भी बने मिले थे। उसके बाद बाघ जंगल में चला गया है। उन्होंने नीलगाय को दौड़ाने की घटना भी गलत बताई है।