भाजपा के गोला विधायक अरविंद गिरि ने अवैध खनन और बालू-मिट्टी के कई गुना दाम बढ़ने के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 11 सितंबर को तहसील गोला में पुलिस और प्रशासनिक बैठक बुलाई है। उन्होंने कहा है कि बालू और मिट्टी के लिए जनता का उत्पीड़न न रुका तो वह जल्द ही अगली रणनीति बनाएंगे।
विधायक गिरि का कहना है कि प्रशासन ने आम जनता की परवाह किए बगैर अधिक रॉयल्टी वाले के नाम ठेका कर दिया। उनका कहना है कि एक साल पहले तक गोला में मिट्टी की ट्रॉली पांच सौ रुपये में मिलती थी, जबकि बालू की ट्राली एक हजार रुपये में थी। भाजपा की सरकार आने के बाद गोला में मिट्टी की ट्राली एक हजार से डेढ़ हजार रुपये में, जबकि बालू की ट्राली चार से पांच हजार रुपये में बिकने लगी। इसी तरह जिला मुख्यालय पर इनके रेट और अधिक बढ़ गए।
विधायक ने इसकी वजह जनहित को दरकिनार कर अधिक रॉयल्टी पर ठेका करना बताया है। उनका कहना है कि इसका हर हालत में तब तक विरोध जारी रहेगा, जब तक खनन से भ्रष्टाचार खत्म कर जनता को उचित मूल्य पर बालू और मिट्टी नहीं मिलने लगेगी। उन्होंने कहा कि निजी उपयोग के लिए आम लोगों को मिट्टी और बालू खनन की अनुमति मिलनी चाहिए। पुलिसिया भ्रष्टाचार भी खत्म होना चाहिए।
एक ट्रॉली पर खर्चा
एक ट्राली : 80 से 90 क्विंटल बालू
रॉयल्टी : 1,660
भाड़ा : 1,200
मार्केट रेट: पांच से छह हजार
अधिक कमाई के लिए माफिया कर रहे ओवरलोडिंग
महेवागंज। जिले में धड़ल्ले से हो रहे अवैध खनन और बालू-मिट्टी के कई गुना दाम बढ़ने पर भाजपा के गोला विधायक अरविंद गिरि न सिर्फ चिंतित हैं, बल्कि उन्होंने इस मुद्दे को पिछड़ा वर्ग सम्मेलन में उठाकर पार्टी फोरम पर भी उठा दिया है। इसके बाद भी अवैध खनन पर लगाम लगती नजर नहीं आ रही। आलम यह है कि कमाई के फेर में नियमों को दरकिनार कर रविवार को भी बालू से ठसाठस भरी दर्जनों ट्रालियां सड़कों पर फर्राटा भरती रहीं। खास यह कि ओवरलोडिंग पर लगाम का ढिंढोरा पीटने वालों की नजर भी इन पर नहीं। कीमत ज्यादा पाने के चक्कर में मानक से कई घन मीटर ज्यादा बालू ढोई जा रही है। लोगों की नजर से बचाने के लिए इन पर तिरपाल आदि डालकर ढक कर ले जाया जाता है।
नियम की आड़ में खेल
भू-तत्व और खनिज कर्म द्वारा जारी अभिवहन पास रायल्टी के नियमों पर अगर गौर करें तो ट्रॉली में चार घन मीटर से ज्यादा बालू भरना नियम विरुद्ध है। बावजूद इसके ट्रॉलियों में पांच से 10 घन मीटर तक बालू का उठान किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो कीमत अधिक वसूलने के चक्कर में एक ट्राली में दो ट्रालियों के बराबर रेता भरा जा रहा है। इसमें मिलीभगत भी होती है।
लगातार खुदान, फिर भी कम नहीं पड़ रही बालू
परमिट क्षेत्रों से खुदान लगातार जारी रहने के बावजूद रेता कम नहीं पड़ता। इससे अवैध खनन को प्रमाणिकता मिलती है, वहीं खुदान की समय सीमा भी आगे बढ़ती रहती है।
फोन पर बात करते ही दरोगा ने छोड़ दी बालू भारी ट्रॉली
महेवागंज। रविवार को महेवागंज चौकी पुलिस ने बनवारीपुर गांव के पास से लखीमपुर की ओर आ रही बालू भरी दो ट्रैक्टर ट्रॉलियों को पकड़ा था। दोनों ट्रॉलियों को चौकी लाया गया। इसी बीच चौकी इंचार्ज अनिल सिंह के मोबाइल पर एक कॉल आई और उसके बाद उन्होंने दोनों ट्रालियों को छोड़ने का हुक्म सुना दिया। हालांकि इस बाबत चौकी इंचार्ज अनिल सिंह का कहना है कि जांच पड़ताल में यह बात सामने आई कि डंप की गई बालू भरकर ट्रॉलियां जा रही थीं। उनकी रायल्टी भी जमा थी, इसलिए छोड़ दी गईं।
खनन ठेका की नीलामी मार्केट रेट के हिसाब से होती है। जिले में तीन पट्टे नियमानुसार किए गए हैं। इसके अलावा अन्य कहीं खनन की जानकारी नहीं है। अमर उजाला ने अवैध खनन का मुद्दा उठाया है, जो सराहनीय है। यदि कहीं नियम विरुद्ध खनन मिला तो कार्रवाई की जाएगी।
- उमेश नरायन पांडे, प्रभारी-खनन/एडीएम