गुस्से में गजराज, वन महकमा परख रहा मिजाज
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के दक्षिण निघासन रेंज में सहतेपुरवा गांव के पास जंगली हाथियों के हमले से एक ग्रामीण की मौत और पांच लोगों के घायल होने की घटना से न केवल क्षेत्रीय ग्रामीण बल्कि वन विभाग भी सकते में है। यह इस इलाके में अपनी तरह की पहली घटना है। अभी तक हाथी फसलों को नुकसान पहुंचा कर चले जाते थे, इस बार हाथी ने हमला कर छह लोगों को घायल कर दिया। जिसमें से एक बुजुर्ग की मौत हो गई। वन विभाग के लोग हाथी का मिजाज परखने में जुटे हुए हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय का कहना है कि हमलावर हाथी संभवत: अकेला टस्कर (लंबे दांत वाला हाथी) है। टस्कर झुंड में न रहकर अलग थलग ही रहते हैं। यह अन्य हाथियों की अपेक्षा ज्यादा आक्रामक होते हैं। परिस्थितियां इसी ओर इशारा करती हैं कि अकेले टस्कर ने ही सभी छह ग्रामीणों को घायल किया है। जिन तीन हाथियों के आकर वापस जाने की बात कही जा रही है उसके कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि इस पहलू पर भी वन विभाग के अधिकारी जांच कर रहे हैं।
पहले यह हाथी नेपाल से दुधवा आते थे और कुछ दिन यहां रुक कर चले जाते थे। अब नेपाल में काफी जंगल कट चुका है। इससे नेपाल से आए हाथी यहीं के होकर रह गए। वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि हाथी एक बार जो रास्ता अख्तियार कर लेते हैं। उसी रास्ते पर ही हर बार आते जाते हैं। यह प्रक्रिया हाथियों की पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है। दुधवा में हाथी नेपाल केे बसंता रिजर्व से अंबरगढ़, सठियाना होते हुए पहुंचते हैं। जबकि किशनपुर सेंक्चुरी में शुक्ला फांटा से पीलीभीत होते हुए आते हैं। यह हाथी दुधवा टाइगर रिजर्व के कर्तनिया घाट होते हुए यहां तक पहुंचे हैं। इनका रास्ता कौड़ियाला घाट, मंझरा होते हुए है। इस बार इन हाथियों ने लंबे अरसे बाद यह कॉरीडोर अपनाया है। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल पटेल का कहना है कि पिछले माह 16 नवंबर को हाथी ढखेरवा खालसा तक आए थे। इसके बाद चले गए थे। ठीक एक माह बाद हाथी फिर अपने पुराने ट्रैक से इधर लौटे हैं।
मंझरा जंगल लौट रहा है हमलावर हाथी
हाथी के हमले की घटना के बाद से ही लगातार हाथी की निगरानी की जा रही है। हाथी को जंगल में वापस भेजने का प्रयास हो रहा है। दुधवा के वाइल्ड लाइफ वार्डेन एसके अमरेश के नेतृत्व में ड्रोन कैमरे से हाथी की लोकेशन पता लगाई जा रही है। दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया हाथी के लठौहा जंगल से मंझरा जंगल की ओर लौटने के संकेत मिले हैं। वन विभाग के अधिकारी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
वनकर्मियों और एटीपीएफ टीम को दौड़ाया
निगरानी के दौरान रविवार शाम हाथी ने गन्ने के खेतों से निकलकर वनकर्मियों की टीम को दौड़ा लिया। वार्डन एसके अमरेश और वनकर्मियों के हवाई फायरिंग करने पर हाथी वहां से हटा। इसके बाद हाथी ने एसटीपीएफ जवानों पर हमला करने की कोशिश की। जवानों ने जब पटाखे आदि दागे तब जाकर हाथी पीछे हटा। इस बीच हाथी की तस्वीरें कई बार ड्रोन कैमरे में कैद हुई है।
राज्य दैवी आपदा से मिलेगा पहला मुआवजा
वन्यजीव हमले में मौत को राज्य दैवी आपदा घोषित होने के बाद हाथी के हमले में जान गंवाने वाले रामेश्वर की पत्नी को राज्य दैवी आपदा से मुआवजा मिलने जा रहा है। यह वन्यजीव हमले में राज्य दैवी आपदा से मिलने वाला पहला मुआवजा है। यह मुआवजा एक दो दिन में ही रामेश्वर की पत्नी के खाते में पहुंच जाएगा।