उत्तर प्रदेश का इकलौता दुधवा नेशनल पार्क सैलानियों के लिए 15 जून से बंद कर दिया जाएगा। इस बार सैलानी दुधवा की अपेक्षा किशनपुर की ओर ज्यादा आकर्षित हुए। सैलानियों को सबसे ज्यादा टाइगर साइटिंग भी किशनपुर रेंज में हुई। बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में सैलानियों ने किशनपुर सेंक्चुरी जाकर वहां के प्राकृतिक सौंदर्य को देखने के साथ ही टाइगर साइटिंग की। यहां सैलानियों की भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुधवा नेशनल पार्क के पर्यटन परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। अधिकतर सैलानी टाइगर साइटिंग के लिए किशनपुर रवाना हुए।
यूपी का इकलौता दुधवा नेशनल पार्क नवंबर में खुलने के बाद मानसून सत्र के पहले 15 जून को सैलानियों के लिए बंद कर दिया जाता है, क्योंकि जंगल के रास्ते में बरसात होने के कारण कच्चे रास्तों पर जलभराव हो जाता है। इस बार दुधवा नेशनल पार्क में सैलानियों को काफी कुछ देखने को मिला। बाघ के दीदार सैलानियों को बराबर होते रहे। इसमें किशनपुर सेंक्चुरी सैलानियों की पहली पसंद रही। यहां अधिकतर सैलानियों को बाघ के दीदार हुए।
बर्ड फेस्टिवल ने दुधवा की पहचान को दिया नया रंग
पलियाकलां। इस बार यहां आयोजित बर्ड फेस्टिवल के बाद से सैलानियों की आवाजाही यहां काफी बढ़ी है। मुख्यमंत्री के आने के बाद से यहां विकास भी हुआ है तथा दुधवा को नई पहचान भी मिली है। दुधवा के इतिहास में कैनन की तरफ से कराई गई फोटोग्राफी भी जुड़ी। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफरों ने दुधवा के प्राकृतिक और हरियाली स्वरूप को अपने-अपने कैमरों में कैद किया था। इसमें मुंबई के प्रतीक प्रधान प्रतियोगिता के विजेता बने। बर्ड फेस्टिवल का उद्घाटन करने खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचे थे। बर्ड फेस्टिवल के बाद से यहां पर भारी संख्या में सैलानियों ने पहुंचकर जंगल का भ्रमण किया है।
गैंडा पुर्नवास परियोजना फेज टू भी रही आकर्षण
पार्क में गैंडों को उनके नए आशियाने में बसाने के लिए गैंडा पुर्नवास परियोजना फेज टू शुरू की गई थी। जिसमें गैंडों को सकुशल फेज टू में भेजा गया था। इसमें असम के एक्सपर्टों की टीम के साथ ही यहां के स्टाफ ने सहभागिता निभाते हुए फेज टू का सफल संचालन किया था। हालांकि फेज टू में गैंडों का दीदार करने के लिए सैलानियों को तो नहीं जाने दिया गया लेकिन इस परियोजना के लिए भी काफी संख्या में सैलानी यहां पहुंचे।