मार्च में शराब दुकानों का व्यवस्थापन किए जाने के बाद एक अप्रैल से नई पालिसी के मुताबिक शराब की आपूर्ति और बिक्री की जा रही है, लेकिन डिमांड के सापेक्ष आपूर्ति कम होने से ओवररेटिंग का खेल शुरू हो गया है। इसके साथ ही पड़ोसी राज्यों से कालाबाजारी का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि माल न मिलने से ज्यादातर दुकानें बंद पड़ी हैं। विभागीय अधिकारी की माने तो अभी हालात सामान्य होने में करीब एक सप्ताह का समय और लग सकता है।
जनपद में कुल 443 शराब दुकानें हैं, जिनमें देशी की 270, अंग्रेजी की 101, बीयर की 70 और माडल शाप की दो दुकानें हैं। दो चरणों में अब तक हुए व्यवस्थापन में 89 अंग्रेजी और 66 बीयर दुकानें आवंटित हो सकी है। एक अप्रैल से अब तक इन दुकानों को शराब की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बीयर की सप्लाई करीब पांच दिन बाद हुई, जिससे अब तक जनपद को तीन गाड़ी (करीब 2900 पेटी) ही मिली है। इसी तरह अंग्रेजी शराब की छह गाड़ियां मिल सकी हैं। दोनों तरह की शराब की आपूर्ति रामपुर और अलीगढ़ से होती है। पहले बोतलों पर होलोग्राम लगा होता था, लेकिन अब बारकोड डाला जा रहा है। शराब की आपूर्ति में हो रही देरी से कई दुकानें बंद पड़ी है, जिससे लाइसेंसियों को भी चूना लग रहा है। इस घाटे को कवर करने के लिए दुकानदारों ने बीयर पर 10 से 20 रुपये तक ओवररेटिंग शुरू कर दी है। तो वहीं शराब माफिया के सक्रिय होने से दूसरे राज्यों से शराब लाकर सप्लाई का खतरा बना हुआ है।
पूरे प्रदेश का यही हाल है। अंग्रेजी और बीयर की सप्लाई नहीं मिल पा रही है। अभी हालात सामान्य होने में करीब एक सप्ताह का समय लग सकता है। प्रतिदिन डिमांड के मुकाबले आपूर्ति न के बराबर है। - संजय त्रिपाठी, जिला आबकारी अधिकारी