दशहरा मेले के सांस्कृतिक मंच पर 12वें दिन भारतीय अवधी समाज के तत्वाधान में अवध संध्या हुई। इस दौरान कलाकारों ने हरवाही नृत्य पेश कर समा बांध दिया। वहीं अवधी कवियों ने कविता पाठ किया।
अवध संध्या की शुरूआत मुख्य अतिथि एसपी डॉ. एस चन्नपा, विशिष्ट अतिथि रिटायर्ड एडिशनल कमिश्नर ओपी पाठक और डॉ. सियाराम वर्मा ने दीप जलाकर की। कार्यक्रम की अध्यक्षता अशोक टाटंबरी और संचालन राम किशोर तिवारी ने किया। अवध संध्या की शुरूआत कवि प्रमोद पंकज की वाणी वंदन से हुई।
इसके बाद संदीप अनुरागी ने पढ़ा-
अतना ज्यादा चोटान छोटे, सब खाना पानी भूल गवा।
भोरहे जब शीशा में मुंह देखिन, तौ हनुमान जस फूल गवा।।
समीर शुक्ला सिधौली ने पढ़ा-
मिड-डे-मील का पड़वा खाय, आंगनबाड़ी भैंस चबाय।
लरिका भूखन मरे जाति हैं, खाइ जाति हैं ई नंगा।।
डॉ. अंबरीश अंबर ने पढ़ा-
सब ऐस उपाय करो मिलकै, अब सीमा पर बम न फटै कबौ।
बटि जाय भले हंडिया भुरकी, पर हिंदुस्तान न बटे न कबौ।।
प्रमोद पंकज ने पढ़ा-
सच्चा डेरा नाम के, काम घिनौना खेल।
यहि खातिर भगवान ने, दियो जेल मा पेल।।
मेला मंच पर अशोक टाटंबरी, राम किशोर तिवारी सहित अन्य कवियों ने कविता पाठ किया। पालिका ईओ अखिलेश त्रिपाठी व मेला प्रभारी हरवंश दीक्षित ने स्मृति चिह्न देकर कवियों को सम्मानित किया। एसपी ने हरवाही नृत्य के कलाकारों को पांच हजार रुपये देकर सम्मानित किया। इस दौरान संयोजक फारूक सरल ने अवधी समाज की उन्नति के लिए डॉ. पीके गुप्ता, डॉ. राकेश माथुर, अनिल शुक्ला, ऐजाज सिद्दीकी, महेश जायसवाल को सम्मानित किया गया।