तिकुनिया हिसा....
12 अन्य आरोपियों की सलाखों से
बाहर आने की राह हुई मुश्किल
- उम्मीद थी कि किसी एक आरोपी को जमानत मिल जाए तो उसी को बना लिया जाए आधार
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। आशीष मिश्र की जमानत के बाद तिकुनिया हिंसा मामले में जिला जेल में बंद आरोपियों ने भी जेल से बाहर निकलने की उम्मीद बना ली थी। वह भी आशीष मिश्र के ग्राउंड पर जमानत मांग रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के आशीष मिश्र की जमानत रद्द करने के बाद हालात फिर बदल गए हैं। आशीष समेत अन्य 13 आरोपियों की सलाखों से बाहर आने की राह अब मुश्किल हो गई है।
जिला जज अदालत से काफी पहले ही अन्य आरोपियों की जमानत खारिज हुई थी, लेकिन इंतजार था कि किसी एक आरोपी को जमानत मिल जाए तो उसी को आधार बनाकर और आरोपी भी जमानत पर छूट सकेंगे। 10 फरवरी को आशीष मिश्र की जमानत मंजूर हुई थी, जिसमें धाराओं की गड़बड़ी दूर करने को 11 फरवरी को प्रार्थना पत्र दाखिल हुआ। इसके बाद 14 को मंजूरी मिली और आशीष मिश्र मोनू को 15 फरवरी को रिहाई मिल गई। इसी के बाद ही 17 फरवरी को हिंसा के अन्य आरोपी अंकित दास, सत्यम त्रिपाठी, नंदन सिंह बिष्ट और लतीफ उर्फ काले की ओर से जमानत देने के लिए के लिए लखनऊ हाईकोर्ट में नोटिस दाखिल कर दी गई, जिसके अगले दिन 18 फरवरी को शेखर भारती की ओर से भी जमानत नोटिस दाखिल कर दी गई। यही नहीं इसके बाद 4 मार्च को सभासद सुमित जायसवाल की ओर से जमानत नोटिस दाखिल की गई, तो अगले दिन 5 मार्च को शिशुपाल ने भी जमानत अर्जी दाखिल कर दी, जबकि 7 मार्च को आशीष पांडे भी लाइन में लग गए। हालांकि, लवकुश राणा और धर्मेंद्र सिंह बंजारा की ओर से 15 मार्च को जमानत नोटिस दाखिल की गई।
न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोग बताते हैं कि जमानत पर उठ रहे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी लिहाजा लखनऊ हाईकोर्ट बेंच में अन्य आरोपियों की जमानत प्रार्थना पत्र भी विभिन्न प्रक्रिया में फंसे रहे। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अन्य आरोपियों के चेहरे भी लटक गए हैं और उनकी जेल से रिहाई की उम्मीद तो लगभग टल ही गई है।