लखीमपुर खीरी। अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व ने पिछले एक साल में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के नए आयाम गढ़ने में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। मजबूत सूचनातंत्र विकसित कर जहां ज्योति रंधावा जैसे बड़े शिकारियों को पकड़ने में कामयाबी हासिल की, वहीं अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों की घुसपैठ रोकने में भी सफलता प्राप्त की है। इन उपलब्धियों के लिए डीटीआर के फील्ड डायरेक्टर समेत अधिकारियों और कर्मचारियों को सराहना मिली, उन्हें पुरस्कृत भी किया गया।
दुधवा टाइगर रिजर्व में पहली मार मानसून गश्त में एम स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग की गई। एम स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग में दुधवा टाइगर रिजर्व पूरे देश में अव्वल रहा। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने न केवल इसकी सराहना की बल्कि देश के दूसरे टाइगर रिजर्व को इससे प्रेरणा लेने की बात कही। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के मौके पर पूरे दुधवा टाइगर रिजर्व में लांग रूट पेट्रोलिंग भी पहली बार हुई। इसमें दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों, कर्मचारियों, एसटीपीएफ के जवानों और वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करने वाली स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने करीब 700 किलोमीटर पैदल गश्त की। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय का दावा है कि पिछले सात माह के अंदर दुधवा टाइगर रिजर्व में एक लाख किलोमीटर स्मार्ट पेट्रोलिंग की गई है।
सूचना तंत्र मजबूत होने से सुदृढ़ हुआ सुरक्षा चक्र
दुधवा टाइगर रिजर्व में अंतरराष्ट्रीय शिकारी और वन्यजीव तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए सूचना तंत्र मजबूत करने पर बल दिया गया। इसके तहत वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो से समन्वय बनाकर इंटलीजेंस बेस्ड इनफोसमेंट के लिए एसटीएफ और एनटीसीए के सहयोग से सूचनातंत्र मजबूत किया गया। इसी सूचना तंत्र के जरिए यह पता चला कि भारत-नेपाल सीमा पर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर सक्रिय हैं। इसी के आधार पर दुधवा टाइगर रिजर्व में रेड एलर्ट जारी किया गया। डीटीआर के सूचना पर ही पीसीसीएफ (वन्यजीव) सुनील कुमार पांडेय ने भारत-नेपाल सीमा से सटे बिजनौर, पीलीभीत, खीरी, बहराइच से महराजगंज तक निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।
आठ माह में डीटीआर में पकड़े गए 143 वन अपराधी
मजबूत सूचनातंत्र और सुदृढ़ सुरक्षा चक्र के कारण पिछले आठ माह के अंदर दुधवा टाइगर रिजर्व में कुल 143 शिकारी और वन अपराधी पकड़ गए। इनमें दुधवा टाइगर रिजर्व के पलिया प्रभाग से 35, कतर्नियाघाट से 70 और बफर जोन से 38 अपराधी पकड़े गए। जबकि पिछले साल इसी अवधि में मात्र 60 अपराधी पकड़े गए थे। पलिया, संपूर्णानगर रेंज में दशकों से जंगल के अंदर चल रही गौढ़ियों को ध्वस्त किया गया जो अंतरराष्ट्रीय शिकारियों, वन्यजीव तस्करों के अड्डे बनी हुई थी।
दुधवा टाइगर रिजर्व में वन और बाघ आदि अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उल्लेखनीय काम हुआ है। अंतरराष्ट्रीय शिकारियों और वन्यजीव तस्करों के नेटवर्क को तोडने के लिए सूचनातंत्र मजबूत किया गया। डीटीआर में किए गए सुरक्षा प्रयासों के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर दुधवा को अलग पहचान मिली है।
- रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व