साहब! मै जिंदा हूं, बीमार हूं, मेरे रुपये निकाल दो
आधारकार्ड नहीं लगा तो जिंदा ही नहीं मान रही बैंक
एसडीएम ने दिए जांच के आदेश, बोले- होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
धौरहरा। लखनऊ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अपने बेटे के साथ रुपये निकालने पहुंची बीमार बुजुर्ग महिला को बैंक जीवित मानने को तैयार ही नहीं है। वह इलाज के लिए मैनेजर से रुपये निकालने की गुहार लगाती रही लेकिन मैनेजर का दिल नहीं पसीजा। मैनेजर ने उसे बताया कि बैंक अभिलेखों में वह मृतक दर्ज है। पहले जीवित होने का प्रमाणपत्र लाए तभी भुगतान होगा। बाद में कहा कि खाते में आधार कार्ड न लगा होने से उसे सस्पेंड कर दिया गया है। इसलिए भुगतान नहीं हो सकता।
बृहस्पतिवार को प्रतापीबेहड़ गांव की बुजुर्ग महिला रामरानी पत्नी मंगूलाल अपने बेटे संतोष कुमार गुप्ता के साथ कस्बे की लखनऊ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक पहुंची और अपने खाता संख्या के साथ बिड्राल फार्म भरकर पासबुक और अपनी वोटर आईडी के साथ बैंक मैनेजर को दिया। जिसपर मैनेजर ने उसे पासबुक लौटाते हुए कहा कि अभिलेखों में मृतक के रूप में दर्ज है। रुपये नहीं मिल सकता। इस पर बुजुर्ग महिला रामरानी ने वोटर आईडी दिखाते हुए बोली कि साहब मैं अभी जिंदा हूं और बीमार भी चल रही हूं। इस पर मैनेजर झुंझलाकर उसकी पासबुक फेकते हुए बोले पहले जीवित होने का प्रमाणपत्र लेकर आओ फिर रुपये निकालना।
पीड़ित महिला अपने पुत्र के साथ कोतवाली पहुंची और तहरीर दी। वहां से उसे तहसील जाने को कहा गया। रामरानी ने एसडीएम आशीष कुमार मिश्रा को प्रार्थनापत्र देकर उसे मृतक दर्शाने वाले लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। एसडीएम ने बताया प्रकरण संज्ञान में आया है। जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
शाखा प्रबंधक कृष्ण बिहारी वर्मा ने बताया कि खाता में आधार कार्ड न लगने से इनकी पासबुक मै सस्पेंडेड लिख कर भुगतान रोका है। वह आधार सहित अपने प्रमाणपत्र बैंक में प्रस्तुत करें पासबुक फेंकने की बात गलत है।