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बारासिंघा हिरन के लिए अब स्वर्ग नहीं रहा दुधवा

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वन्यजीव सप्ताह पर विशेष
06एलकेएच 14, 15


बारासिंघा-हिरन के लिए अब स्वर्ग नहीं रहा दुधवा
प्राकृतिक आवास नष्ट होने से साल दर साल घट रही आबादी

अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। बारासिंघा की सर्वाधिक आबादी सहेजने के लिए दुनिया भर में अपनी पहचान रखने वाले दुधवा नेशनल पार्क में पिछले कुछ वर्षों में इनकी संख्या में कमी आ रही है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसका कारण घास के मैदानों के बिगड़ते स्वरूप को मान रहे हैं। नेपाली नदियों से आने वाली बाढ़ ने दुधवा के घास के मैदानों को काफी नुकसान पहुंचाया है। इससे यहां बारासिंघा और पाढ़ा प्रजाति के हिरनों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हुआ है। यदि शाकाहारी वन्यजीवों की गणना परिणामों पर गौर करें तो हिरन की अन्य प्रजातियों की आबादी में मामूली इजाफा हुआ है।
दुधवा नेशनल पार्क दुनिया का एक मात्र ऐसा राष्ट्रीय उद्यान है जहां बारासिंघा की जितनी आबादी है उतनी संख्या में पूरी दुनिया भर में बारासिंघा जीवित भी नहीं बचे हैं। इसी विलक्षणता और बारासिंघा को लुप्त होने से बचाने के लिए ही दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना वर्ष 1977 में हुई थी। नेशनल पार्क की स्थापना के समय यहां बारासिंघों की संख्या करीब 2750 आंकी गई थी। जबकि 2016 की गणना में इनकी संख्या 2226 मिली।
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दुधवा नेशनल पार्क में बारासिंघा समेत पांच हिरन प्रजातियां बहुतायत से पाई जाती हैं। यह भी यहां की विशेषता है। हिरनों की पांच प्रजातियां बारासिंघा, चीतल, पाढ़ा, सांभर और काकड़ एक साथ केवल दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर सेंक्चुरी और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में मिलती है। इनके अलावा यहां कम संख्या में ही सही काला हिरन और चौसिंघा भी यहां मिलते हैं। सोनारीपुर फांटा, गड़ैया फांटा, सठियाना, भादी ताल और किशनपुर सेंक्चुरी के झादी ताल के किनारे बारासिंघा हिरनों के बड़े-बड़े झुंडों को कुलाचे भरते देखा जा सकता है। यह क्षेत्र बारासिंघों का प्राकृतिक आवास रहा है।
राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य और बारासिंघा पर शोध करने वाले वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि नेपाली नदियों में आने वाली बाढ़ ने दुधवा के घास के मैदानों को काफी नुकसान पहुंचाया है। इसके चलते हिरनों का प्राकृतिक आवास विकृत हो गया। इसके कारण हिरनों विशेषकर बारासिंघा की आबादी घटना शुरू हो गई है। अब बारासिंघा के उतने बड़े झुंड कहीं नहीें दिखते जितने दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना के समय आसानी से दिखते थे।
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दुधवा में हिरनों की गणना का तुलनात्मक विवरण
हिरन प्रजाति वर्ष 2010 वर्ष 2013 वर्ष 2016
बारासिंघा 3993 3745 2226
चीतल 11250 12594 13250
पाढ़ा 4706 4784 3114
काकड़ 755 839 1142
सांभर 76 184 219
जंगल में शाकाहारी जीवों की गणना हर तीन साल बाद होती है। अभी 2016 में अंतिम गणना हुई थी।

वर्जन.......
बारासिंघा दुधवा नेशनल पार्क की विशेष पहचान है। नेपाली नदियों से आने वाली बाढ़ ने हिरनों के प्राकृतिक आवास को कुछ बिगाड़ा जरूर है, लेकिन पार्क प्रशासन ग्रासलैंड और वेटलैंड का उचित प्रबंधन कर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की अनुकूलता बढ़ा रहा है।
- महावीर कौजलगि, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क
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