पहले बाढ़ का कहर, अब जीवों का डर
क्रासर.......
तालाब, नालों से निकलकर आबादी में घुस रहे मगरमच्छ
सांप बिच्छू और जहरीले कीटों ने बढ़ाई मुसीबतें
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। बाढ़ के कहर के बाद जहरीले जीवों का डर प्रभावित गांव वालों की मुसीबतें बढ़ा रहा है। बाढ़ अपने पीछे जहां मुफलिसी, भुखमरी और बीमारी छोड़ गई है, वहीं जहरीले सांप, बिच्छू और मगरमच्छ लोगों के घरों तक पहुंच रहे हैं। अब इनसे बचने के लिए गांववालों को काफी सतर्क रहना पड़ रहा है।
बाढ़ के पानी के साथ नदियों, तालाबों और नालों के साथ आबादी इलाके में आ पहुंचे हैं। आए दिन लोगों का सामना इन जीवों से हो रहा है। मगरमच्छ अधिकतर ठहरे हुए मंद बहाव वाले पानी में रहना पसंद करते हैं। बाढ़ आने पर नदियों का पानी इन तालाबों और नालों के पानी में मिलकर गांवों और रास्तों पर भर गया। इस पानी के साथ मगरमच्छ भी गांवों तक आ पहुंचे हैं।
धौरहरा क्षेत्र के कैरातीपुरवा, महराजनगर, चकलाखीपुर, बसहा, समदहा, मंझरी, पौड़पुरवा, बंशीबेली, बनडुकरा, तिनहापुरवा, भंडारीपुरवा, महादेवपुरवा में इन दिनों में लोग मगरमच्छों के आने से परेशान हैं। रात के समय लोगों को रोशनी जलाकर रखनी पड़ रही है। रात में जब लोग घरों से बाहर निकलते हैं तो डंडे लाठी साथ में रखने पड़ते हैं। तीन दिन पहले चिकनाजती गांव में एक मगरमच्छ आबादी के बीच में बैठा दिखाई दिया। गांव वालों ने किसी तरह उसे खदेड़कर बाहर निकाला।
धौरहरा के घोसियाना गांव में घाघरा नदी तेजी से कटान कर रही है। इस गांव में बुधवार को एक मगरमच्छ बेचेलाल के घर के आंगन में बैठा दिखाई दिया। सुबह जब घरवालों ने मगरमच्छ देखा तो उनके होश उड़ गए। शोर मचाकर गांववालों को बुलाया। गांववालों ने किसी तरह उन्हें भगाने मेें कामयाबी पाई। बाढ़ प्रभावित इलाकों में सांप बिच्छु़ओं की तो जैसे भरमार हो गई है। सांपों का खतरा हर समय उनके सिर पर मंडराता रहता है। बच्चे तो घरों में दुबक कर रह गए हैं।
इस बाबत दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि बाढ़ के पानी के साथ मगरमच्छों का रहन-सहन प्रभावित हुआ है। बारिश के दिनों में मगरमच्छों का जलाशयों से निकलना आम बात है। यदि आबादी क्षेत्र में कहीं मगरमच्छ दिखे तो तत्काल वन विभाग को सूचित करें।