लखीमपुर खीरी। पिछले सप्ताह ही आपसी संघर्ष में एक तेंदुए की मौत के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व में एक और नर बाघ को अपनी जान गंवानी पड़ी। दुधवा नेशनल पार्क के दुधवा रेंज में रेलवे ट्रैक से कुछ दूरी पर कालाकुंडा तालाब के पास रविवार सुबह मिले नर बाघ के शव पर घाव के निशान देखकर उसकी मौत आपसी संघर्ष के चलते हुई बताई जा रही है। जहां बाघ का शव मिला है वहां दूसरे बाघ के पगचिह्न भी मिले हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि बाघ का सिर और एक आंख पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। ऐसा आम तौर पर आपसी संघर्ष में ही होता है। बाघ के पंजों के नाखून भी टूटे हुए हैं। उन्होंने बाघ की मौत ट्रेन की चपेट में आने से होने की बात पूरी तरह नकारते हुए कहा कि मृत बाघ के शरीर पर ऐसे कोई निशान नहीं हैं, जिससे ट्रेन की चपेट में आने की बाघ की मौत की पुष्टि हो। उन्होंने बताया कि नर बाघ पूरी तरह वयस्क है। उसकी उम्र करीब 10 साल है।
जंगल में नर बाघों के बीच आपसी संघर्ष होन
कभी इनके बीच प्रणय को लेकर संघर्ष होता है तो कभी टेरीटरी पर कब्जे को लेकर। युवा बाघ पुराने बाघों को खदेड़कर उनकी टेरीटरी पर कब्जा करते हैं। संभवत: युवा बाघ से ही टेरीटरी पर कब्जे को लेकर संघर्ष हुआ होगा। जिसमें इस बाघ को अपनी जान गंवानी पड़ी। बाघ की मौत के असल कारण का पता शव के पोस्टमार्टम के बाद ही चल सकेगा।
सिकुड़ रहे जंगल, बढ़ रही बाघों की आबादी
दुधवा टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल बफरजोन को मिलाकर करीब 2000 वर्ग किलोमीटर है जिसमें घने वनों का क्षेत्रफल 1600 वर्ग किलोमीटर है इसमें मौजूदा समय में तीन सौ से अधिक बाघ हैं। बाघों के घनत्व के लिहाज से यह क्षेत्रफल कम पड़ने लगा है। ऐसे में टेरीटरी के लिए बाघों के बीच आपसी संघर्ष बढ़ना लाजिमी है।
कई बाघ और तेंदुए चढ़े हादसों की भेंट
-1997-किशनपुर सेंक्चुरी में सड़क पार करते समय वाहन की चपेट में आकर बाघ की मौत।
-2011-पुवायां रेंज में सड़क हादसे में बाघ की मौत
-2011-भीरा-पलिया रोड पर सड़क हादसे में बाघ की मौत, शव कई दिन बाद मिला।
2011-भीरा-खुटार रोड पर वाहन की चपेट में आकर बाघ की मौत।
-2012-मैलानी रेज के महुरेना जंगल में सड़क हादसे में बाघ की मौत, शव कई दिन बाद मिला।
-18 जनवरी 2015-किशनपुर सेंक्चुरी में भीरा रोड पर कुरियानी गांव के पास वाहन की चपेट में आकर नर तेंदुए की मौत।
-18अगस्त2017-कर्तनिया घाट में गोंडा-मैलानी रेल लाइन पर ट्रेन की चपेट में आकर मादा बाघ की मौत।
-2016-भीरा रेंज में किशनपुर से सटे गन्ने के खेत में बाघ का कंकाल मिला।
मानव-वन्यजीव संघर्ष, शिकारियों के शिकार हुए बाघ
-2008-कर्तनिया घाट से निकलकर धौरहरा रेंज पहुंचे एक तेंदुए को ग्रामीणों ने पीट पीट कर मार डाला। इसके बाद उसके शव को जला दिया।
-13 अप्रैल 2018- दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के दक्षिण निघासन रेंज में ग्रामीणों ने एक बाघिन को पीट-पीट कर मार डालने का प्रयास किया।
-04 नवंबर 2018-दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी के चल्तुआ गांव में भीड़ ने एक बाघिन को ट्रैक्टर से कुचल कर मार डाला।
-27मार्च 2018-दक्षिण खीरी वन प्रभाग के महेशपुर रेंज में शिकारियों के फंदे में फंस कर बाघ की मौत।
बाघों के बीच टेरीटरी पर कब्जे को लेकर आम तौर से संघर्ष की घटनाएं होती हैं। दुधवा में मृत मिले बाघ की मौत भी संभवत: आपसी संघर्ष में हुई है। मामले की जांच कराई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बाघ की मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा।
- रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व