गोला गोकर्णनाथ।
मेला मैदान में ही रामलीला कराने की मांग को लेकर हिंदू संगठन और लोक जनसंघर्ष पार्टी मैदान में उतर आई है। दोनों संगठनों ने मुख्यमंत्री को फैक्स और ई-मेल कर रामलीला मेला मैदान में कराने की मांग की है। साथ ही कहा है कि मेला मैदान में रामलीला न हुई तो अशोक चौराहा स्थित इंदिरा पार्क में 21 सितंबर से धरना देंगे।
पत्र में लिखा है, यहां विगत 127 वर्षों से श्री रामलीला मेला मैदान में हो रही है। मेला के सहारे मैदान में दुकानें लगाने का सिलसिला शुरू हुआ किंतु इस समय मेला मैदान में दुकानदारों द्वारा पूरी तरह अतिक्रमण कर लिया गया है। इस वर्ष रामलीला समिति ने मेला का स्थान परिवर्तित कर नीलकंठ मैदान में श्रीरामलीला आयोजन का निर्णय लिया और दुकानें हटवाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। एसडीएम ने सर्वेक्षण के बाद समिति से निर्णय बदलने को कहा, किंतु समिति पदाधिकारियों ने नीलकंठ मैदान में मेला करने का निर्णय लिया है। ज्ञापन पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामनिवास शुक्ल, बबलू सिंह अर्कवंशी, नवीन श्रीवास्तव, विश्व हिंदू परिषद के मंत्री लवकुश दीक्षित, आशीष कुमार, पिंकल मिश्र, नीरज कुमार गुप्ता, आशीष कुमार, सुधीर गुप्ता, अशोक जोशी, कृष्ण कुमार यादव, बाबा गौरक्षक नाथ, पिंटू सिंह अर्कवंशी, संगम सिंह, जयंद्र मिश्र आदि के हस्ताक्षर हैं।
समिति महामंत्री बोले, मेला मैदान में ही होगा दशहरा
श्रीरामलीला समिति के महामंत्री राजेश आनंद मिन्नी ने बताया कि कोई परंपरा नहीं टूट रही है। सिर्फ श्रीरामलीला का मंचन नीलकंठ मैदान में होना है, जबकि दशहरा यानी रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद वध और पुतला दहन मेला मैदान में होगा। कार्यक्रम कराने के लिए मेला मैदान खाली कराया जाएगा। प्राचीन चबूतरे पर ध्वज पूजन परंपरागत ढंग से कराया जाएगा।
छोटी काशी की आस्था से जुड़ी है एक शताब्दी पुरानी श्रीरामलीला
छोटी काशी की श्रीरामलीला का इस वर्ष एक 128वां आयोजन है। मेला मैदान में होने वाले इस आयोजन को इस बार एकाएक बदलने जाने से लोग पसोपेश में हैं। इस बाबत बाबा गौरक्षक नाथ और भाजपा नेता शिव कुमार बाजपेई पिंटू का कहना है कि नगर की श्री रामलीला एक प्राचीन परंपरा है, जिससे लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है, जिसका स्थान परिवर्तन करने से लोगों की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंची है। जिसका वह हर स्तर पर विरोध करेंगे। स्थान परिवर्तन के विरोध में वह उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भी दे चुके हैं। वहीं अधिवक्ता मनोज श्रीवास्तव और समाजसेवी वरुण अग्रवाल का कहना है कि श्री रामलीला महोत्सव धार्मिक आस्था एवं प्राचीन परंपरा है, जिसका स्थान परिवर्तन नहीं होना चाहिए। बिना किसी राय के महोत्सव का स्थान बदला गया। कमेटी को जनता का मनोभाव जानना जरूरी है।