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बाघ की नहीं मिली लोकेशन 

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बाघ की नहीं मिली लोकेशन  - फोटो : लखीमपुर खीरी, अमर उजाला
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ममरी।
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पसियापुर गांव में 27 अगस्त को अधेड़ नारायण लाल को निवाला बनाने और सुंदरपुर के बाबूराम पर हमला करने वाले खूनी बाघ को ढूंढने में लगी वन कर्मियों की टीम को सोमवार को भी कोई सफलता नहीं मिली।
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रेंजर एसएन यादव का मानना है कि बाघ अपना रुख जंगल की ओर भी कर सकता है। उधर, सुंदरपुर के बीडीसी रामकुमार वर्मा, प्रधान रामविलास चौधरी, बाबूराम, सरदार जोगा सिंह का कहना है कि बाघ जंगल में न जाकर अभी कठिना नदी के इर्दगिर्द खड़े गन्ने के खेतों में छुपा हो सकता है। वन कर्मियों की टीम का नेतृत्व कर रहे फोरेस्टर बृजेश सिंह, रामनरेश वर्मा का कहना है कि गन्ने के खेत में शनिवार से बराबर कांबिंग जारी है, लेकिन बाघ की अबतक कोई लोकेशन नहीं मिली है। ऐसा प्रतीत होता है कि बाघ देवीपुर बीट के जंगल में या फिर सहजनवां बीट के जंगल में चला गया है। फिर भी एहतियातन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। वनकर्मी नेता रामप्रसाद जेपी वर्मा का कहना है कि बाघ यदि मौजूद होता तो कहीं न कहीं उसके ताजे पदचिन्ह अवश्य मिलते। कैमरों की फुटेज में बाघ की तस्वीर भी दिखाई नहीं दे रही। फिर भी भयभीत गांव वालों, फार्मरों को सतर्क रहने और खेतों में समूह बनाकर जाने की सलाह दी जा रही है।
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