निघासन। कस्बे के झंडी मार्ग पर आयोजित 251 कुंडीय विराट गायत्री महायज्ञ के तीसरे दिन शनिवार को क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया। सुबह से देर शाम तक चले धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। यज्ञ स्थल पर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला।
प्रातःकाल कार्यक्रम की शुरुआत प्रज्ञा योग ध्यान से हुई। इसके बाद सामूहिक जप-साधना, देव पूजन एवं दो पालियों में गायत्री महायज्ञ संपन्न हुआ। महायज्ञ के दौरान अग्नि, वायु, जल, सूर्य, पृथ्वी माता सहित समस्त देव शक्तियों का पूजन किया गया। देव पूजन एवं महायज्ञ में करीब 300 यजमानों ने सहभागिता की।
इनमें यज्ञ भूषण सिंह, योगेश दीक्षित मोनू, शिव गुप्ता, दामोदर वर्मा, आशीष गुप्ता, अशोक तिवारी, श्यामसुंदर पांडे और पुष्कर जायसवाल सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने यज्ञ वेदी में आहुतियां दीं। महायज्ञ का संचालन शांतिकुंज हरिद्वार से आई गायत्री शक्तिपीठ की टोली नायक परमानंद द्विवेदी ने संपन्न कराया।
शाम को युग प्रवचन, भक्ति संगीत एवं सांस्कृतिक संध्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। प्रवचनों के माध्यम से जीवन में संस्कार, साधना, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना को आत्मसात करने का संदेश दिया गया, जिसे श्रोताओं ने गंभीरता से ग्रहण किया।
सात तक चलेगा धनुष यज्ञ मेला, मिली अनुमति
बिजुआ। गांव पड़रिया तुला में चल रहे ऐतिहासिक धनुष यज्ञ मेले की अवधि बढ़ा दी गई है। क्षेत्रीय विधायक अमन गिरी के हस्तक्षेप के बाद अब यह मेला सात जनवरी तक जारी रहेगा। पहले इसकी अनुमति 25 दिसंबर को समाप्त हो गई थी। मेले की अवधि समाप्त होने के बाद स्थानीय लोगों ने इसे बढ़ाने के कई प्रयास किए लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद मेले के व्यापारियों ने भाजपा नगर अध्यक्ष दिनेश गुप्ता से संपर्क कर अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने विधायक अमन गिरि के संज्ञान में लाया। विधायक अमन गिरि ने मामले में हस्तक्षेप किया। इसके बाद मेले को सात जनवरी तक जारी रखने की घोषणा की गई। संवाद
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सीता हरण और भक्त शबरी का सुनाया प्रसंग
गोला गोकर्णनाथ। स्वामी विवेकानंद बाल उद्यान में चल रही श्रीराम कथा में व्यास अजयानंदजी महाराज ने सीताहरण और शबरी की पावन कथा का बखान किया। यह भक्तिपूर्ण कार्यक्रम सुनकर श्रोता भाव विभोर हो गए। शनिवार को व्यास ने कहा की प्रभु श्रीराम सीता की खोज करते हुए जीव-जंतु,स्थावर आदि से सीता का पता पूछ रहे हैं। सीता की खोज करते हुए प्रभु श्रीराम भक्त शबरी के आश्रम में पहुंचते हैं। शबरी जन्म-जन्म से अपने प्रभु श्री राम के दर्शन की प्रतीक्षा कर रही है। यह प्रसंग सुन श्रोता भाव विभोर हो गए। इस मौके पर वनवारी लाल जायसवाल, गेंदनलाल कनौजिया, केके शुक्ल, राजकुमार शुक्ल, संतोष कुमार, मनोज मिश्र, दुर्गाप्रसाद मिश्र, शशिबाला राबड़ा, आदर्श शुक्ला और नीलम वाजपेयी आदि मौजूद रहे। संवाद