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Kushinagar News: काठमांडो से उठी जेन-जी की सियासत, मधेश और सीमा पार तक गूंज

Mon, 09 Mar 2026 02:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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सिद्धार्थनगर। नेपाल की राजनीति में बदलाव की नई कहानी लिखी जा रही है। सोशल मीडिया की ताकत और युवा नेतृत्व के उभार ने वहां की पारंपरिक राजनीति को नई दिशा दी है। पड़ोसी राष्ट्र में बदली सियासी हवा की आंच सरहद पार भी महसूस की जाएगी। इस बदलाव के केंद्र में उभरे सबसे चर्चित चेहरा काठमांडो महानगर के मेयर बालेंद्र (बालेन) शाह, नेपाल की उभरती जेन-जी राजनीति के प्रतीक माने जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बालेन शाह की राजनीति लोकप्रिय राष्ट्रवाद और युवा असंतोष के मिश्रण पर आधारित दिखाई देती है। यही कारण है कि उनके उभार को सिर्फ स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा बल्कि इसे नेपाल की बदलती राजनीतिक संस्कृति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. शुभेंदु त्रिपाठी का कहना है कि बालेन शाह की लोकप्रियता काठमांडो तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया के जरिये उनका सीधा संवाद और एंटी-एस्टेब्लिशमेंट छवि उन्हें युवाओं के बीच अलग पहचान देती है। इसकी गूंज मधेश क्षेत्र और भारत से लगी खुली सीमा वाले इलाकों तक भी सुनाई दे सकती है। समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पांडेय के मुताबिक, नेपाल में पहली बार शहरी युवाओं की इतनी स्पष्ट राजनीतिक भागीदारी दिखाई दे रही है। यही वजह है कि कई विश्लेषक इसे जेन-जेड राजनीति के उभार के रूप में देख रहे हैं।



हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की नई राजनीति को अंततः भू-राजनीतिक वास्तविकताओं से भी संतुलन बनाना होगा। नेपाल आर्थिक और व्यापारिक रूप से भारत से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में चाहे राजनीतिक बयानबाजी कितनी भी तेज क्यों न हो, नेपाल के लिए भारत के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना व्यावहारिक आवश्यकता है।
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इतिहासकार बताते हैं कि भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा दोनों देशों के रिश्तों की अनूठी पहचान रही है, लेकिन नए राजनीतिक ट्रेंड और राष्ट्रवादी विमर्श के कारण कुछ मुद्दे संवेदनशील भी हो सकते हैं। सीता, बुद्ध या साझा सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर बहसें पहले भी उठती रही हैं, लेकिन डिजिटल युग में इन मुद्दों की गूंज और तेज हो सकती है।



विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई पीढ़ी की यह राजनीति राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचती है तो नेतृत्व को भारत, चीन और नेपाल के भीतर विभिन्न सामाजिक समूहों, खासकर मधेश क्षेत्र के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।





गरम हो सकती है हक की सियासत

- मधेश और तराई क्षेत्र भारत से सांस्कृतिक और भाषाई रूप से गहरे जुड़े हुए हैं। यहां की बड़ी आबादी बिहार और उत्तर प्रदेश से अपने पारिवारिक रिश्तों, भाषा और सामाजिक संपर्क के कारण करीब महसूस करती है। ऐसे में यदि काठमांडो केंद्रित राष्ट्रवादी राजनीति तेज होती है, तो मधेशी समुदाय के भीतर प्रतिनिधित्व, पहचान और अधिकारों को लेकर बहस फिर से तेज हो सकती है।
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कौन हैं बालेन शाह



- काठमांडो महानगर के मेयर बालेंद्र (बालेन) शाह

- पेशे से सिविल इंजीनियर, रैपर के रूप में भी पहचान



- 2022 में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर चर्चा में आए

- सोशल मीडिया के जरिए युवाओं में मजबूत पकड़



- विशेषज्ञ उन्हें नेपाल की “जेन-जी राजनीति” का प्रमुख चेहरा मानते हैं





राष्ट्रवाद के मुद्दों पर मुखर

- फिल्म आदि पुरुष के संवाद को लेकर विरोध



- सीता को भारत की बेटी कहे जाने पर आपत्ति

- काठमांडो में हिंदी फिल्मों की स्क्रीनिंग रोकने की चेतावनी



- ग्रेटर नेपाल के नक्शे को लेकर भी चर्चा में रहे

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मधेश पर इसलिए असर की चर्चा

- नेपाल का तराई क्षेत्र भारत से सांस्कृतिक रूप से जुड़ा



- बड़ी आबादी बिहार और उत्तर प्रदेश से भाषाई रूप से करीब

- राष्ट्रवादी राजनीति से मधेशी असंतोष की आशंका



- खुली सीमा के कारण पहचान और राजनीति के मुद्दे संवेदनशील
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