मंसाछापर। जटहां बाजार थाना क्षेत्र के खेसिया गांव के पोखरा टोला में सगे भाइयों के बीच जलभराव के विवाद में 1 मई की शाम हुई मारपीट में गंभीर रूप से घायल लकठू उर्फ छोटेलाल कुशवाहा की सोमवार सुबह मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में मौत हो गई। इस सूचना से घर में कोहराम मच गया। पोस्टमार्टम के बाद शव देर रात तक गांव लाया जाएगा। इस मामले में नामजद आरोपी घर छोड़कर भाग गए है। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
मारपीट में कई लोग घायल हो गए, जबकि छोटेलाल के सिर में गंभीर चोट आई थी। घायल छोटेलाल को तत्काल गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। मृतक छोटेलाल कुशवाहा के भाई लल्लन कुशवाहा ने चार लोगों पर मारपीट कर हत्या का आरोप लगाया है। घटना के बाद से ही आरोपी परिवार समेत घर छोड़ दिए हैं। पुलिस ने चार लोगों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। अब मौत के बाद धारा बदल सकती है। छोटेलाल अपने पीछे पत्नी सुमन और छह वर्षीय बेटे अभिषेक को छोड़ गया है। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। थानाध्यक्ष अभिनव मिश्र ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पहले से दर्ज धाराओं में बढ़ोतरी की जाएगी। आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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अब सुमन और मासूम अभिषेक का सहारा कौन
खेसिया गांव के पोखरा टोला में हुआ यह विवाद भले ही रास्ते पर जलभराव को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन इसका अंजाम इतना दर्दनाक होगा, यह किसी ने नहीं सोचा था। छोटेलाल कुशवाहा की मौत के बाद अब उसके घर में सन्नाटा है। सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति उसकी पत्नी सुमन की है, जो बार-बार बेसुध हो जा रही है। सुमन के सामने अब जिंदगी का सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, आखिर वह अपने छह साल के मासूम बेटे अभिषेक का पालन-पोषण कैसे करेगी।
अभिषेक अभी इतना छोटा है कि उसे यह भी ठीक से समझ नहीं आ रहा कि उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है। वह बार-बार लोगों से अपने पिता के बारे में पूछ रहा है, जिससे वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो जा रही हैं।परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही बहुत मजबूत नहीं बताई जा रही है। छोटेलाल ही घर का मुख्य सहारा था, जो मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसके जाने के बाद अब घर की जिम्मेदारी पूरी तरह सुमन के कंधों पर आ गई है।गांव के लोगों में भी इस घटना को लेकर गहरा दुख और पछतावा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते विवाद को शांत करा लिया गया होता, तो आज एक परिवार बर्बाद होने से बच सकता था। लोगो का कहना है कि यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि छोटे-छोटे विवादों को समय रहते सुलझा लेना कितना जरूरी है। वरना एक पल का गुस्सा जिंदगी भर का दर्द बन जाता है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुमन और उसके मासूम बेटे अभिषेक के भविष्य का क्या होगा।
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