पडरौना। केंद्र सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप का प्रयास कर रही है। शरीयत में किसी तरह का बदलाव मुसलमान स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप की बजाय देश के विकास पर ध्यान दे। ये बातें बुधवार को मदरसा अंजुमन इस्लामिया दारूल उलूम बसहिया के परिसर में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए मौलाना आफताब आलम अलीमी ने कहीं।
तीन तलाक और समान नागरिक आचार संहिता के मामले पर चर्चा के लिए आयोजित अल्पसंख्यक समुदाय की इस बैठक में मौलाना आफताब अलीमी ने कहा कि कुरआन और हदीश में हर समस्या का हल मौजूद है। उलेमा भी चाहें तो शरियत में बदलाव संभव नहीं है। भारतीय संविधान भी किसी को धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं देता। मौलाना इनायतुल्ला हाफिज क्यामुद्दीन ने कहा कि सरकार अल्पसंख्यक वर्ग की समस्याओं के समाधान की बजाय धार्मिक मामलों में बेवजह हस्तक्षेप कर रही है। इस दौरान मास्टर मुहम्मदीन कारी, याकूब, मास्टर जमाल, मौलाना अब्दुल लतीफ, मौलाना मुजाहिद, शबीना खातून, रेहाना खातून, राबिया खातून, सलीमुन्नेशा आदि ने भी तीन तलाक और समान नागरिक संहिता पर अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान उलेमाओं के साथ ही अल्पसंख्यक वर्ग के तमाम अन्य लोग भी मौजूद थे।