बुजुर्गों के आशीर्वाद से बढ़ता है आयु, विद्या, यश और बल
कसया (कुशीनगर)। युवा के अंदर कार्य की शक्ति होती है। कार्य सही दिशा में हो इसका तरीका बुजुर्ग बताते हैं। बुजुर्गों के आशीर्वाद से युवाओं में आयु, विद्या, यश और बल में वृद्धि होता है। बुजुर्ग के पास हर समस्या का समाधान होता है।
कुशीनगर में चल रही रामकथा के समापन पर कथावाचक मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं को लोक कथाओं के जरिए नीतिगत बातें समझाईं। बुजुर्गों की अहमियत बताने के लिए एक कथा सुनाते हुए कहा कि एक व्यापारी ने पांच हजार रुपये में कुआं खरीदा था। कुआं बेचने वाले शख्स ने व्यापारी को पानी निकालने से मना कर दिया। व्यापारी ने वजह पूछी तो उसने बताया कि केवल कुआं बेचा है, पानी नहीं। इसलिए कुएं का पानी का उपयोग व्यापारी नहीं कर सकता। परेशान व्यापारी ने कई लोगों से गुहार लगाई। जब कोई हल नहीं निकला तो एक बुजुर्ग के पास पहुंचा। बुजुर्ग ने उपाय बताते हुए कहा कि कुआं तुम्हारा तो पानी दूसरा कैसे रखेगा, वह अपना पानी ले जाए। व्यापारी को तुरंत ही उपाय समझ में आ गया।
एक और कथा सुनाते हुए कहा कि दो भाई थे, बड़ा भाई चतुर था। दोनों ने एक भैंस खरीदी। भैंस का बंटवारा किया गया। बंटवारे में भैंस का अगला भाग छोटे भाई और पिछला भाग बड़े भाई को मिला। अब रोजाना बड़ा भाई भैंस से दूध निकालता और अपने बच्चों को दूध, दही व मक्खन खिलाता। छोटा भाई केवल भैंस को चारा खिलाता। एक दिन छोटा भाई साधु के पास पहुंचा। साधु के बताए उपाए सुनकर छोटा भाई घर पहुंचा। जब दूध निकालने का समय आया तो उसने भैंस के सींग पर लाठी मारना शुरू कर दिया। अगले दिन बड़े भाई ने छोटे भाई का हिस्सा दे दिया। इसलिए बुजुर्गों की सलाह लेकर कार्य करना चाहिए।