सुगंधित धान की खेती के लिए उपयुक्त है जिले की मिट्टी और जलवायु
- जिले में एक लाख बीस हजार हेक्टेयर में होती है धान की खेती
- सुगंधित धान काला नमक व बासमती प्रजाति की खेती के लिए किया जा रहा है शोध
सुधीर कुमार मिश्र
पडरौना। सिद्धार्थनगर जिले की तरह कुशीनगर जिले में भी सुगंधित धान (काला नमक, बासमती आदि) की खेती हो सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया की तरफ इस पर शोध भी किया जा रहा है। जिले में एक लाख 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती होती है। अधिकांश किसान सरजू बावन प्रजाति के धान की रोपाई करते हैं। अगर सुगंधित प्रजाति के धान की रोपाई शुरू करें तो इससे उनकी आय में भी वृद्धि हो सकती है।
किसी भी सुगंधित धान की पैदावार के लिए दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। कुशीनगर तराई क्षेत्र है। यहां पर्याप्त मात्रा में दोमट मिट्टी पाई जाती है। जो काला नमक, बासमती जैसे सुगंधित प्रजाति की फसल के लिए उपयुक्त है। जिले में 60 से 65 प्रतिशत तराई क्षेत्रफल में धान की रोपाई की जाती है। इसमें से 20 से 25 प्रतिशत क्षेत्रफल ऊंचाई पर स्थित है। जहां मोटे अनाज जैसे सरजू बावन प्रजाति के धान की पैदावार होती है। लेकिन जिले में सुगंधित धान की रोपाई के करीब 20 प्रतिशत क्षेत्रफल उपयुक्त है। यहां किसान काला नमक, बासमती, पूसा सुगंधा तीन, पूसा सुगंधा चार, पूसा सुगंधा पांच (25/11) जैसी प्रजाति की सुगंधित धान की फसल उगाई जा सकती है। इन सुगंधित धान की फसलों में अधिक से अधिक पैदावार कैसे हो, इसके लिए जिले तमकुहीराज स्थित कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया में शोध कार्य चल रहा है। इसके अलावा किसानों के खेत में इसकी प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है। बीज का शोधन कर ही किसान धान की नर्सरी तैयार कर सकते हैं। संवाद
इसकी नर्सरी कैसे करें तैयार
एक हेक्टेयर धान की रोपाई के लिए 20 से 25 किलोग्राम बीज की जरूरत पड़ती है। इसके लिए लगभग पांच कट्ठा खेत की अच्छी तरह से जुताई-गुड़ाई करके क्यारी बना लें। इसमें अच्छी प्रजाति के अंकुरित बीज की बेहन डालें। इस नर्सरी की समय-समय पर सिंचाई करते रहें। 20 से 25 दिन में धान की नर्सरी तैयार हो जाएगी।
कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया सेवरही के मृदा वैज्ञानिक डॉ. त्रिलोकनाथ राय ने बताया कि कुशीनगर जिले की मिट्टी और जलवायु सुगंधित धान जैसे काला नमक, बासमती समेत अन्य प्रजाति की धान की बुआई के लिए उपयुक्त है। इसके लिए समय-समय पर शोध कार्य चल रहे हैं, जिससे धान की फसल में पैदावार बढ़ाई जा सके। इसकेलिए भी कई उपाय किए जा रहे हैं। जिले के किसान सुगंधित धान की बुआई के लिए आगे आएं तो उनकी आय बढ़ सकती है।