पडरौना। मार्च के दूसरे सप्ताह में दिन में 30 डिग्री सेल्सियस और रात में 19 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पहुंच गया है। मौसम का यह मिजाज लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहा है। रविंद्रनगर स्थित मेडिकल काॅलेज की ओपीडी में मंगलवार को बुखार के साथ पेट दर्द, खांसी और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सक दवा के साथ खानपान में बदलाव की सलाह दे रहे हैं।
मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ. उपेंद्र चौधरी ने बताया कि मौसम में अचानक इतनी गर्मी होने का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। ओपीडी में आने वाले मरीज में मौसम जनित बीमारियों से दिक्कत है। मरीज बुखार, लगातार खांसी, पेट में मरोड़ और थकान के साथ सिर दर्द की शिकायत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है। वायरल बुखार के साथ पेट से जुड़ी दिक्कतें भी देखने को मिल रही हैं।
ज्यादातर मामलों में यह वायरल संक्रमण है, जो दवा और आराम से कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। अगर बुखार तीन दिन से ज्यादा बना रहे या पेट दर्द और खांसी बढ़ जाए तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। मेडिकल कॉलेज की आहार विशेषज्ञ डाॅ. अर्पिता सिंह ने बताया कि मार्च का महीने भले ही हो लेकिन अप्रैल और मई जैसी गर्मी पड़ रही है। इसलिए लोगों को खानपान बदलने की जरूरत है। अब नींबू पानी, नारियल पानी, दही व छाछ, खीरा के साथ खरबूज, ककड़ी, संतरा और लीची का सेवन करना चाहिए। शरीर को ठंडा रखने के लिए हल्का व कम मसालेदार और ताजा खाना खाएं। पुदीना, प्याज, और सलाद (लेट्यूस) को डाइट में शामिल करें। पालक, केल, और लौकी जैसी आसानी से पचने वाली सब्जियां खाएं। सुबह के नाश्ते में दलिया, भीगी हुई किशमिश, पोहा या इडली-सांभर जैसे हल्के विकल्प चुनें।
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इन लक्षणों पर दें ध्यान
- हल्का या तेज बुखार।
- खांसी या गले में खराश।
- पेट दर्द या मरोड़, उल्टी।
- शरीर में कमजोरी और थकान।
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इन बातों पर करें अमल
- बासी या खुला खाना न खाएं।
- साफ व उबला हुआ पानी पिएं।
- स्वच्छता का ध्यान रखें।
- मौसम के अनुसार कपड़े पहनें।