रामचरित मानस की पूजा करते श्रद्धालु।
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राम और भरत एक-दूसरे को बता रहे थे सत्ता का अधिकारी
राम वनवास, सीता की खोज, राम-रावण युद्ध आदि की मोरारी बापू ने कथा सुनाई
कसया (कुशीनगर)। कुशीनगर में चल रही मोरारी बापू की रामकथा के छठें दिन शेष छह सोपानों की कथा सुनाई गई। कथावाचक ने राम वनगमन से लेकर राम-रावण युद्ध और वापस अयोध्या आने पर राज्याभिषेक की कथा सुनाई। इस दौरान राम-भरत संवाद का प्रसंग खास तौर पर वर्णित किया गया।
कथावाचक मोरारी बापू ने कहा कि राजा दशरथ राम के राज्याभिषेक की तैयारी में थे। इसी दौरान कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वचनों की याद दिलाते हुए भरत को राजा बनाने और राम को वनवास मांग लिया। राम, लक्ष्मण और सीता वन की ओर प्रस्थान कर गए। तमसा नदी के तट को पार कर श्रृंगनेरपुर पहुंचे। वहां से गंगा नदी को पार कर प्रयागराज पहुंचे। वहां से चित्रकूट जाकर कुटिया बनाई। भरत अयोध्या लौटे और सारी जानकारी पाकर अत्यंत दुखी हुए। राजा दशरथ के अंतिम संस्कार के बाद वे गुरु वशिष्ठ व अन्य लोगों के साथ राम को मनाने चित्रकूट पहुंचे। वहां राजा जनक भी पहुंचे थे। कई दिन की मंथन के बाद भी राम 14 वर्ष का वनवास पूरा हुए बिना अयोध्या लौटने को तैयार नहीं थे। इधर, भरत भी राजगद्दी पर बैठने को तैयार नहीं थे। अंतत: भरत राम की खड़ाऊं को माथे पर रखकर वापस लौटे और अयोध्या के राज सिंहासन पर राम की खड़ाऊं रखकर राज करने लगे। राम चित्रकूट से आगे बढ़े और ऋषि-मुनियों से मिलते हुए गोदावरी तट पर कुटी बनाकर निवास करने लगे। वहां मारिच वध हुआ। रावण ने सीता का हरण कर लिया। सीता की तलाश में निकले राम-लक्ष्मण की हनुमान से मुलाकात हुई। बलि वध कर सुग्रीव को राजा बनाया। वानरी सेना सीता की तलाश में समुद्र के किनारे पहुंची। वहां संपाती ने बताया कि माता सीता लंका की अशोक वाटिका में हैं। जामवंत के बताने पर हनुमान समुद्र लांघकर लंका पहुंचे। वहां माता सीता को राम का संदेश सुनाया। लंका जलाकर वापस लौटे और राम को सीता की खबर दी। राम और लक्ष्मण वानर-भालुओं की सेना के साथ समुद्र के किनारे पहुंचे। समुद्र पर सेतु बांधकर लंका पहुंचे राम-लक्ष्मण ने एक-एक कर राक्षसों को निर्वाण प्रदान किया। अंत में रावण को निर्वाण प्रदान कर विभिषण को लंका का राजा बनाया। पुष्पक विमान से राम, सीता, लक्ष्मण समेत प्रमुख लोग वापस अयोध्या लौटे। अयोध्या लौटने से पूर्व राम ने श्रृंगनेरपुर रुककर निषाद राज से मुलाकात की। राम के अयोध्या पहुंचने से पूर्व ही हनुमान जी ने भरत जी से मिलकर राम के आगमन की सूचना दे दी थी।