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कटान से सहमे डीह टोला के लोग करने लगे पलायन

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एपी बांध की चौकसी करती तरयासुजान पुलिस। - फोटो : KUSHINAGAR
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कटान से सहमे डीह टोला के लोग करने लगे पलायन
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अमर उजाला ब्यूरो
तमकुहीरोड। अहिरौलीदान के डीह टोला में गंडक नदी की कटान के बावजूद किसी प्रकार का बचाव कार्य शुरू नहीं होने से लोग भयभीत हैं। क्योंकि पूर्व में कटान के चलते ही बैरिया टोला, चित्तू टोला और कंचन टोला का वजूद गंडक नदी में विलीन हो चुका है।
अहिरौलीदान गांव का लगभग 600 की आबादी वाला डीह टोला गंडक नदी के किनारे बसा है। इस टोला के बाद बिहार की सीमा शुरू हो जाती है। पिछले चार दिनों से गंडक नदी ने कटान शुरू कर दिया है। इससे डीह टोला के वजूद पर भी खतरा मंडराने लगा है। इसे देखते हुए प्रहलाद यादव, नथुनी यादव, राजपत यादव सहित कई लोग अपना पक्का मकान तोड़कर उसके मलवे के साथ सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करने लगे हैं। वहीं दीनानाथ, लल्लू, धुरंधर, श्रीकिशुन, लालबाबू, हरिलाल, केदार आदि अपने जरुरी सामान हटाने के साथ अपने मकानों को तोड़ने की तैयारी में लगे हैं। यहां के सुरेश, अशोक, राजेश आदि का कहना है कि अब तो नदी का पानी टोले में प्रवेश कर गया है। सड़क पर पानी आ चुका है, जिससे सामान हटाने में भी भारी मुश्किलें आ रही है।
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शनिवार को एसडीआरएफ टीम के साथ गांव में पहुंचे एसडीएम एआर फारुखी ने लोगों को सुरक्षित स्थान पर चले जाने की सलाह दी थी। रविवार को भी लोगों का पलायन जारी रहा।
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लेखपाल नकछेद साह, ग्राम प्रधान हीरालाल यादव, किसान मोर्चा के जिला मंत्री जेके सिंह, मैनेजर सिंह, वशिष्ठ सिंह, पप्पू सिंह, संजय सिंह आदि का कहना है कि इसी कटान के चलते पांच साल पहले बैरिया टोला, चित्तू टोला और कंचन टोला का वजूद गंडक नदी में समा गया था। यदि समय रहते कटान रोकने का इंतजाम नहीं किया गया तो इस टोले का वजूद भी खतरे में पड़ सकता है।
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