पडरौना। जिले के निकाय चुनाव में आश्चर्यजनक परिणाम आए हैं। जिले की सात में से सिर्फ दो निकायों में ही भाजपा उम्मीदवारों को जीत मिली है जबकि दो जगह सपा और शेष तीन जगह निर्दलीयों ने जीत दर्ज किया है। कुशीनगर नगर पालिका और सेवरही नगर पंचायत में अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के बीच बेहद करीबी मुकाबला होने के चलते रिकाउंटिंग की मांग को लेकर करीब दो घंटे तक परिणाम रूका रहा। इस दौरान समर्थकों ने बाहर हंगामा भी किया। प्रशासन ने सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से निपटाते हुए यहां भी परिणाम घोषित कर विजेता उम्मीदवारों को देर शाम प्रमाण पत्र दे दिया।
पडरौना नगर पालिका परिषद में भाजपा उम्मीदवार विनय कुमार जायसवाल ने कांग्रेस उम्मीदवार शिवकुमारी देवी को हराया। यहां सपा उम्मीदवार हैदर अली राईनी तीसरे नंबर पर और बसपा उम्मीदवार इंद्रजीत चौथे स्थान पर रहे।
हाटा नगर पालिका परिषद में भाजपा उम्मीदवार मोहन वर्मा ने सपा उम्मीदवार मारकंडेय को हराया। बसपा उम्मीदवार रामानंद तीसरे नंबर पर रहे।
कुशीनगर नगर पालिका परिषद की मतगणना सुबह आधे घंटे की देरी से शुरू हुई। यहां शुरूआती दौर में ही निर्दलीय किरन जायसवाल और निर्दलीय साबिरा खातुन के बीच मुकाबला सिमट गया। अंतिम चक्र की गणना में परिणाम साबिरा के पक्ष में जाता देख किरन के समर्थक हंगामा करने लगे। देर शाम डीएम आंद्रा वामसी व एसपी यमुना प्रसाद की मौजूदगी में यहां अवैध मतों की गणना के बाद निर्दलीय साबिरा खातुन को विजेता घोषित किया गया। यहां भाजपा उम्मीदवार रेखा देवी तीसरे नंबर और बसपा उम्मीदवार इंदू देवी चौथे नंबर पर रहीं।
कप्तानगंज नगर पंचायत का चुनाव भी निर्दलीय आभा गुप्ता के पक्ष में रहा। आभा ने निर्दलीय मोहम्मद नासीर को 800 से अधिक मतों के अंतर से हराया। यहां सपा तीसरे और भाजपा पांचवें नंबर पर रही। बसपा और कांग्रेस उम्मीदवारों को 200 से भी कम वोट मिले।
नगर पंचायत रामकोला में दो ही उम्मीदवार थे। यहां सपा की उम्मीदवार रमिता ने भाजपा उम्मीदवार कविता को 867 मतों के अंतर से हराया।
नगर पंचायत खड्डा में भी सपा उम्मीदवार रुख्साना जमाल लारी ने भाजपा उम्मीदवार संगीता देवी को कड़े मुकाबले में 215 मतों के अंतर से हराया।
नगर पंचायत सेवरही में भी शुरू से ही भाजपा उम्मीदवार डॉक्टर बाबूलाल को निर्दलीय व निवर्तमान चेयरमैन श्याम सुंदर विश्वकर्मा से कड़ी टक्कर मिली। अंतिम चक्र की गणना पूरी होते ही भाजपा उम्मीदवार के समर्थक रिकाउंटिंग की मांग करने लगे। परंतु प्रशासन ने इसे अस्वीकार कर दिया। करीब एक घंटे बाद श्याम सुंदर विश्वकर्मा को विजेता का प्रमाण पत्र दे दिया गया।