स्वास्थ्य व्यवस्था की जानकारी लेते डीएम महेन्द्र सिंह तंवर।स्रोत-सोशल मीडिया
पकड़ियार बाजार (कुशीनगर)। नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के पिपरा खुर्द गांव में बुखार की चपेट में आए दो और मासूमों की मौत गोरखपुर में इलाज के दौरान हो गई। डॉक्टरों ने इनकी भी मौत की वजह लेप्टोस्पायरोसिस बताया है। इसके पहले दो गांवों में चार बच्चों की मौत हो चुकी है। एक सप्ताह के अंदर हुई ताबड़तोड़ मौतों से गांव वाले जहां सहमे गए हैं, वहीं जिम्मेदारों की बेचैनी भी बढ़ती जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने इसकी रोकथाम के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। लखनऊ से आई एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम ने गांव में भ्रमण कर बीमारी से जुड़ी जानकारी जुटाई। डीएम, सीडीओ और सीएमओ ने गांव में पहुंचकर परिजनों से मिलकर पूरी जानकारी ली। वहीं गांव में अभियान चलाकर जांच किया गया। इसमे 56 लोगों की जांच में 14 लोग बुखार से पीड़ित मिले, जिनका सैंपल जांच के लिए भेजा गया।
पिपरा खुर्द गांव के गुलहरिया टोला निवासी राजकुमार के सात वर्षीय बेटे सागर को बृहस्पतिवार को बुखार हुआ। परिजन निजी अस्पताल में इलाज के लिए ले गए। राहत नहीं मिलने पर रामकोला सीएचसी पर शुक्रवार को लेकर गए। इलाज के बाद स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर मेडिकल कॉलेज कुशीनगर डॉक्टरों ने रेफर कर दिया। यहां से डॉक्टरों ने हालत नाजुक बताते हुए बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर शनिवार को रेफर कर दिया।
इलाज के दौरान आराम नहीं होने पर परिजन गोरखपुर एम्स लेकर चले गए, जहां इलाज के दौरान रविवार की रात को मौत हो गई। इनके पड़ोसी रामानंद के तीन वर्षीय बेटे अंश को बुखार होने पर शनिवार को रामकोला सीएचसी पर परिजन लेकर गए जहां से इलाज के बाद मेडिकल कॉलेज कुशीनगर डॉक्टरों ने रेफर कर दिया। उसी दिन शाम को बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर डॉक्टरों ने रेफर कर दिया।
सोमवार को सुबह इलाज के दौरान बीआरडी मेडिकल कॉलेज में उसकी मौत हो गई। मंगलवार को दोपहर में गांव पहुंचे अफसर व डॉक्टरों की टीम ने जांच किया। इसमें 14 लोग बुखार से पीड़ित मिले, जिसमें मृतक अंश का भाई आर्यन (9) भी शामिल है।
बुखार से पीड़ित 14 लोगों का टीम ने सैंपल लिया और जांच के लिए बीआरडी गोरखपुर भेजा। लखनऊ से आई टीम में डा. एके चौधरी मंडलीय सर्विलांस अधिकारी बस्ती, डा. राजेश सिंह स्टेट एपी डोमिनोलाजिस्ट गांव में भ्रमण कर परिजनों से बात कर पूरी जानकारी जुटाई।