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Kushinagar News: तालाब में डूबने से दो मासूमों की मौत, मची चीख-पुकार

Mon, 11 Aug 2025 01:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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खड्डा (कुशीनगर)। मठिया बुजुर्ग गांव के तालाब में स्नान कर रहे दो बच्चों की डूबकर रविवार को मौत हो गई। इसकी खबर मिलते ही घरवालों में चीख-पुकार मच गई। पोस्टमार्टम कराने के लिए करीब एक घंटे तक पुलिस और परिजनों के बीच बहस हुई। बाद में परिजन शवों का पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार हुए।
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खड्डा थाना क्षेत्र के मठिया बुजुर्ग निवासी बुद्धिप्रकाश शर्मा का सात वर्षीय बेटा हिमांशु तथा पड़ोसी अलहम अंसारी की आठ वर्षीय बेटी आफरीन रविवार को दोपहर में गांव के बच्चों के साथ तालाब में स्नान कर रहे थे। इस दौरान दोनों गहरे पानी में चले गए और डूब गए। यह देख साथ में स्नान करने वाले बच्चे डरकर तालाब से निकलकर भाग गए। काफी देर तक बच्चे नहीं दिखे तो परिजनों ने ढूंढ़ना शुरू किया, तब इसकी जानकारी हुई। तालाब के पास जाने पर उसमें दोनों बच्चों का शव उतराया हुआ मिला। इसकी जानकारी मिलते ही गांव वालों की भीड़ जुट गई। हिमांशु गांव के ही एक स्कूल में कक्षा एक का छात्र था। हिमांशु की एक छोटी बहन है। घर की आर्थिक हालत कमजोर होने के कारण पिता बाहर रहकर काम करते हैं। घर पर मां अंजली व बुजुर्ग दादा-दादी रहते हैं। आफरीन चार बहनों में सबसे छोटी थी। इसके एक भाई है। माता-पिता मजदूरी करके जीवन यापन करते हैं। आफरीन के परिजन पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर रहे थे, बाद में प्रधान तथा ग्रामीणों के समझाने-बुझाने पर राजी हुए। इसके बाद पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थानाध्यक्ष गिरिजेश उपाध्याय ने बताया कि शवों को कब्जे में लिया गया है। तालाब में स्नान करते समय डूबने से दोनों बच्चों की मौत हुई है।
हादसे के बाद घरों में पसरा मातम
मठिया बुजुर्ग गांव में दोनों बच्चों की मौत के बाद घरों में मातम पसर गया। हिमांशु की मां बेटे के शव से लिपटकर रो रही थी। बदहवास मां उसे बार-बार उठा रही थी। यह सुनकर मौके पर जुटे लोगों की आंखें भी नम हो गईं। दहाड़ मारकर रो रही मां का कहना था कि रविवार को छुट्टी थी। दोपहर में हिमांशु अपने हाथ से रसोई घर में रखा खाना निकालकर खाया था। मां ने उसे घर में रहने को कहा था, लेकिन पता नहीं कब निकलकर तालाब की ओर से गया। बुजुर्ग दादा रामप्यारे पोते की मौत की सूचना मिलते ही जमीन पर बेहोश कर गिर पड़े। उनकी आंखों के सामने पोते का शव पड़ा था। वे बार-बार कह रहे थे ऊपर वाले बच्चे की जगह हमें उठा ले जाते। परदेश में पिता को इस घटना की जानकारी देने का साहस कोई नहीं कर पा रहा था।
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आफरीन की मां व बड़ी बहनें बदहवास
मेहनत मजदूरी कर परिवार पालने वाले अलहम घटना के बाद भाव शून्य हो गए थे। वह एक ही बात बार-बार बोल रहे थे कि पता नहीं कब आफरीन स्नान करने चली गई। मां व बड़ी बहनें बच्ची के शव को किसी को छूने नहीं दे रही थी। वह बड़बड़ा रही थीं कि वह सोई हुई है। उनको संभालने में जुटी महिलाएं व ग्रामीण भावुक हो जा रहे थे। दोनों बच्चों के घर से करीब दो सौ मीटर दूर गांव के बाहर सार्वजनिक तालाब है। अभी यह निर्माणाधीन है। अक्सर गांव के बच्चे इसमें स्नान करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के बच्चे स्नान के लिए बड़ी संख्या में जुट जाते हैं। इनके घर के लोग कभी कभी पहुंचकर अपने अपने बच्चों को डांट कर ले जाते हैं। जहां पोखरा है वहां कोई घर नहीं है। इस वजह से यहां अक्सर लोगों की नजर नहीं पड़ती है। जिस समय यह हादसा हुआ उस समय कोई बड़ा व्यक्ति वहां पर मौजूद नहीं था।
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