फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पानी में तीन गुना अधिक आर्सेनिक

Mon, 16 Apr 2018 11:54 PM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
विज्ञापन
ख्ाराब पानी - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
विज्ञापन
पडरौना।   कई गंभीर रोगों का कारक माने जाने वाले आर्सेनिक नाम के खतरनाक रसायन की मौजूदगी कुशीनगर जिले के पानी में पाई जाने लगी है, वह भी निर्धारित मात्रा से तीन से चार गुना अधिक। जिले भर में ऐसे 19 पुरवे चिह्नित किए गए हैं, जहां के पानी में आर्सेनिक पाया गया है। नतीजतन वहां स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए परियोजनाएं तैयार करने की मुहिम शुुरू कर दी गई है।    
विज्ञापन

              
जल को जीवन की संज्ञा दी गई है, लेकिन कुशीनगर जिले के भूगर्भ जल में कई तरह की कमियां पाई जा रही हैं। साधारण हैंडपंपों के पानी में जहां हानिकारक वैक्टीरिया मिलने लगे हैं, वहीं यह पानी एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) जैसी जानलेवा बीमारी का प्रमुख कारण भी माना जा रहा है। अब तो इस जिले के भूगर्भ जल में आर्सेनिक नाम का खतरनाक रसायन मिलने की भी पुष्टि हो गई है। इसकी जानकारी दो महीने पूर्व हुई सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद हुई है।                   
                  
जलनिगम से मिली जानकारी के मुताबिक कसया क्षेत्र के अंध्या गांव का नटवा, भलुही मदारीपट्टी गांव का मदारी पट्टी, चकदेइयां का बाजार टोला, मैनपुर गांव का रजवाबर और सिरसिया खोइया गांव का बड़का टोला, सेवरही ब्लॉक का बहिराबारी व सरैया खुर्द, तमकुही क्षेत्र के चखनीखास गांव का कोड़रा टोला, धनौजी, सरैया बुजुर्ग, माधोपुर बुजुर्ग और इसी गांव का मनझरिया, नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक का गुलहरिया खास, पचफेड़ा खास व रामपुर खुर्द खास, कप्तानगंज ब्लॉक का सकरौली खास, हाटा ब्लॉक का नरकटिया खास, रधिया देवरिया खास और परसौनी खास के पानी में आर्सेनिक पाया गया है।                    
विज्ञापन

             
पानी में आर्सेनिक की मौजूदगी से कैंसर सहित कई जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। आमतौर एक लीटर पानी में 0.01 मिलीग्राम से अधिक आर्सेनिक नहीं होना चाहिए, लेकिन दो माह पूर्व सर्वे के दौरान लिए गए नमूने की जांच में आर्सेनिक मिलने की पुष्टि हुई है। यह जांच जलनिगम विभाग के लखनऊ स्थित प्रदेशस्तरीय लैब में हुई। कुशीनगर के इन 19 पुरवों के पेयजल में 0.03 से .04 मिलीग्राम प्रतिलीटर आर्सेनिक की मात्रा पाई गई है। रिपोर्ट आने के बाद विभाग के अफसर भी चकित हैं।                   
               
विशेषज्ञों का मानना है कि इस जनपद से हिमालय की दूरी कम होने के कारण पानी में आर्सेनिक अशुद्धि पाई जा रही है। बड़ी गंडक उसी हिमालय से निकली है, जिसके किनारे यह जनपद है। हिमालयी चट्टानों के लाखों वर्षों के दौरान घिसने से वातावरण में आर्सेनेट की मौजूदगी बढ़ी और यह पानी के जरिये हम तक पहुंच रहा है।                   
            
आर्सेनिक एक सेमी मटैलिक तत्व है जो आयरन, कैल्शियम, कॉपर आदि के साथ क्रिया करता है। इसे इसके जहरीलेपन की वजह से जाना जाता है। इसमें कैंसर उत्पन्न करने की क्षमता है। यह हवा, पानी, त्वचा या भोजन के संपर्क में आकर हमारे शरीर में पहुंच सकता है।                   
               
पडरौना नगर के फिजिशियन डॉक्टर अजय शुक्ला बताते हैं कि पानी में सुरक्षित स्तर से अधिक आर्सेनिक होने पर त्वचा रोग की शुरुआत हो सकती है। इससे आर्टिरियास्कलेरोसिस जैसा नसों का रोग, किडनी के रोग, मानसिक रोग, हृदय रोग हो सकता है। यही नहीं त्वचा, फेफड़े, लीवर, किडनी और ब्लड कैंसर भी हो सकता है।                   
       
शासन की तरफ से दो माह पहले जनपद के इन गांवों में सर्वे कराया गया था, जिसकी रिपोर्ट अब आई है। यहां के पेयजल में आर्सेनिक जैसे हानिकारक रसायन का मिलना बेहद चिंताजनक है। आर्सेनिक प्रभावित सभी पुरवों में ओवरहेड टैंक के माध्यम से पेयजल मुहैया कराने के लिए स्टीमेट बनाया जा रहा है।                   
विज्ञापन

प्रमोद कुमार गौतम, एक्सईएन                   
जलनिगम।                   
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें