खड्डा। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की गिनती पूरी हो गई है। इसके लिए कई कैमरे लगाए गए थे। कैमरों में लगे ‘चिप’ दिल्ली भेजे जाएंगे, जहां विशेषज्ञ गणना करेंगे।
फरवरी से शाकाहारी जानवरों की गिनती की जानी है। वनकर्मियों का पुन: प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के 899 वर्ग किलोमीटर में फैले, दो प्रमंडलों और सात रेंजों में बंटे जंगल के बाघों की गिनती के लिए वन विभाग ने अभियान चलाया।
वन प्रमंडल दो में दो माह पहले 400 से ज्यादा कैमरे लगाए गए थे, जिन्हें बुधवार से हटाया जाने लगा। इन कैमरों में लगे चिप को दिल्ली भेजे जाएंगे, जहां विशेषज्ञ चिप में उपलब्ध तस्वीरों के जरिए बाघों की गणना करेंगे।
वन विभाग के सूत्र बताते हैं कि चिउटहां वन क्षेत्र में दो बंगाल रायल टाइगर देखे जाने से महकमे में उत्साह का माहौल है। उम्मीद है कि बाघों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई होगी। बाघों की गिनती के बाद शाकाहारी वन्य प्राणियों की गिनती एक फरवरी से प्रारंभ होगी।
इसके लिए बुधवार से वनकर्मियों को मदनपुर वन क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो वन क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर तीन दिनों तक चलेगा।
शाकाहारी जानवरों की गिनती के लिए भी कैमरे लगाए जाएंगे। क्योंकि मांसाहारी जानवरों के अलावा बड़ी तादाद में शाकाहारी जानवर भी इस वन में रहते हैं।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के निदेशक आरबी सिंह ने बताया कि गणना का काम समाप्त हो गया है। दिल्ली में विशेषज्ञ जांच कर संख्या बताएंगे। इसके बाद शाकाहारी जानवरों की गिनती शुरू होगी। इसके लिए प्रशिक्षण चल रहा है।