खड्डा। फर्जी परवाना के जरिए खड्डा तहसील में नाम दर्ज कराने के खेल में तहसील के कुछ जिम्मेदारों की संलिप्तता सामने आई है। परवाना आदेश को जांचे बिना मालिकान रजिस्टर में नाम क्यों दर्ज कर दिया गया, इसकी जांच की जा रही है।
गोपनीय रूप से नामांतरण करने के इस खेल की जांच में तहसील में तैनात कर्मचारियों का नाम सामने आया है। जानकारों का कहना है कि एआरओ कोर्ट गोरखपुर की असली रिपोर्ट को बदलकर नकली रिपोर्ट जमा किया जाना, बिना तहसीलकर्मियों की मिलीभगत से संभव नहीं है। ऐसे में फर्जीवाड़ा करने वालों से तहसील में तैनात जिम्मेदार कम दोषी नहीं हैं।
एआरओ कोर्ट गोरखपुर में बिना मुकदमा चले गलत वाद नंबर से फैसले का आदेश व परवाना खड्डा तहसील में एआरओ गोरखपुर के कोर्ट से डाक से भेजा जाता रहा। सत्यापन के लिए तहसील से भेजे गए पत्र में जवाबी रिपोर्ट बदलकर फर्जी तरीके से सही होने की रिपोर्ट तहसील पहुंंच जा रही है। इसी के आधार पर मालिकान रजिस्टर में नाम दर्ज करने का आदेश भी तहसीलदार से करा लिया गया।