मथौली। मोतीचक ब्लॉक के मधौली नगर में बना कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का भवन पांच साल में जर्जर हो गया। डीएम ने फाइल तलब कर जांच के आदेश का आदेश दिया, लेकिन तीन माह बाद भी जांच नहीं हुई और फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
निर्माण कराने वाले ठेकेदार को बचाने में बीएसए कार्यालय में तैनात एक बाबू की भूमिका बताई जा रही है। संबंधित फर्म को नोटिस जारी कर जिम्मेदार खुद का बचाव कर रहे हैं। भवन में कंपन होने के कारण यहां के छात्रों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया गया। डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने फाइल तलब कर दोबारा जांच के लिए आदेश दिया है। इसके लिए सीडीओ के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम जांच के लिए गठित की गई है।
मोतीचक ब्लॉक में कस्तूरबा विद्यालय वर्ष 2008-2009 में 36 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था। भवन दो अक्तूबर वर्ष 2010 को बेसिक शिक्षा विभाग को हैंडओवर किया गया था। पांच साल बाद ही भवन का फर्श टूटने लगा। दीवारों के प्लास्टर गिरने और छत में कंपन होने लगा। इससे बच्चे डर गए और शिक्षक भी भवन के अंदर जाने से कतराने लगे।
पूर्व विधायक रामानंद बौद्ध ने तत्कालीन डीएम से इसकी शिकायत की तो इसकी जांच टेक्निकल टीम की मदद से की गई। टीम ने विद्यालय भवन को जर्जर बताते हुए कहा कि इस भवन में बच्चों को पढ़ाना खतरनाक बताया। आनन-फानन में इसे खाली कर मोतीचक बीआरसी परिसर स्थित विद्यालय भवन में शिफ्ट करा दिया गया। डीएम के निर्देश पर जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है। डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि मामला गंभीर है। जांच के लिए टीम बनाई गई है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।