पकवा इनार। मुख्य महापरिनिर्वाण स्थली में बुधवार को सूर्योदय के साथ ही विदेशी मेहमानों की आवक आरंभ हो गई। यह सिलसिला सूर्यास्त तक प्रमुख दर्शनीय स्थलों पर बना रहा। माहौल पूरा बुद्ध मय था। चारों ओर बुद्ध के उपदेश और वंदना गुंजायमान होता रहा।
सूर्योदय के साथ सुबह सात बजे थाईलैंड के तीन समूह में 74 पर्यटक, 7.30 बजे स्पेन के 25 पर्यटक, 8.20 बजे वर्मा के 13 व थाई लैंड के सात पर्यटक,
8.50 बजे श्रीलंका के 160 पर्यटक, 9.0 बजे इंडोनेशिया के 24 पर्यटक, दोपहर बाद श्रीलंका के तीन, इटली के एक, 3.30 बजे कंबोडिया के 270 व मलेशिया के 33 पर्यटकों का हुजूम मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में बुद्ध की लेटी प्रतिमा की विशेष पूजा-अर्चना किया। बुद्ध वंदना के साथ चीवर चढ़ाया। स्तूप की परिक्रमा की। उत्खनित पुरावशेषों की ऐतिहासिकता व प्राचीनता से रू-ब-रू हुए। फिर भू स्पर्श मुद्रा में मांथा कुंवर मंदिर में महात्मा बुद्ध की प्रतिमा देखी। वहां से पर्यटकों का हुजूम शाम 4.30 बजे बुद्ध के अंतिम संस्कार स्थल रामाभार स्तूप पहुंचा। जहां अपने अपने तरीके से परिक्रमा की। बेर के फूल चढ़ाए और कैंडल भी जलाया। पर्यटकों ने ध्यान भी किया। इस मौके पर भंते अशोक,भंते नंद का, भिक्षु उपाली, भंते बोध्यांग समेत तमाम बौद्ध भिक्षु मौजूद थे।