पडरौना। शहर से रात आठ बजे के बाद गोरखपुर जाने वाले लोगों को निगम की बस नहीं मिलती है। इसकी वजह से लोगों को डग्गामार वाहनों से यात्रा करना पड़ता है। ऐसे में यात्रियों को काफी दिक्कत का सामना तो करना ही पड़ता है, साथ ही किराए के नाम पर अधिक रुपये भी खर्च करने पड़ते हैं।
पडरौना डिपो की तरफ से 39 बसों का संचालन होता है। इसमें 15 से अधिक बसें पडरौना बस स्टेशन के अलावा जिले के अन्य प्रमुख कस्बों से लखनऊ और दिल्ली तक संचालित होती हैं। शेष बसों को पडरौना-गोरखपुर वाया कसया और पडरौना-देवरिया वाया कसया के रास्ते संचालित होती है। इसके अलावा गोरखपुर और देवरिया समेत अन्य डिपो की भी कई बसें पडरौना आती हैं।
जिला मुख्यालय होने के चलते कई ऐसे कर्मचारी हैं जो गोरखपुर से प्रतिदिन पडरौना आकर सरकारी कार्यालयाें में काम करते हैं। वहीं शहर के अलग-अलग बैंकों में तैनात कई कर्मचारी भी गोरखपुर से पडरौना की नियमित यात्रा करते हैं। उन्हें विभागीय कार्य निपटाने में अक्सर देर हो जाती है।
जब वे पडरौना बस स्टेशन बस पकड़ने पहुंचते हैं तो उन्हें बस नहीं मिलती है। मजबूरन वे बिहार की तरफ से आने वाली डग्गामार वाहनों से गोरखपुर तक यात्रा करते हैं। ये डग्गामार वाहन उन्हें गोरखपुर के कुसमही जंगल के पहले ही रोक देते हैं।
वहां से उन्हें ई-रिक्श या टेम्पो से गोरखपुर जाना पड़ता है। इससे उन्हें परेशानी होने के साथ ही किराए के नाम पर अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं। विभागीय अधिकारियों की अगर बात की जाए, तो वे सवारी कम होने का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लेते है। संचालन शाम के ठप होने से लोगों को परेशानी उठाने पड़ती है। इस संबंध में एआरएम जयप्रकाश प्रधान ने कहा कि ठंड की वजह से रात आठ बजे के बाद सवारी कम मिल रही थी। इसलिए बस संचालन करने में दिक्कत हो रही थी।