पडरौना। गर्मी बढ़ने के साथ ही आग की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। साथ ही अग्निशमन विभाग की मुश्किलें भी बढ़ जाती हैं। संसाधनों के अभाव के चलते आग पर काबू कर पाने में मुश्किलें आ रही हैं। इससे लोगों को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ता है। आग बुझाने की जिम्मेदारी अग्निशमन विभाग पर है, लेकिन विभाग खुद मुश्किलों से जूझ रहा है। संसाधनों के अभाव के चलते आग बुझाने में समस्या आ रहा है। संसाधनों व कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा अग्निशमन विभाग आग की लपटों से होने वाली बर्बादी को रोक पाने में अक्षम साबित हो रहा है। हालांकि गर्मी अभी अपने रौ में आई भी नहीं है कि आग ने बर्बादी की कहानी लिखनी शुरू कर दी है। जिले के 980 गांव, तीन नगर व 10 उपनगरों में रहने वाली 40 लाख से अधिक की आबादी को आग से बचाने के जो इंतजाम हैं वह नाकाफी हैं।
पडरौना, सेवरही, खड्डा व कप्तानगंज समेत चार स्थानों पर स्थायी और कप्तानगंज व हाटा में सीजनल फायर स्टेशन हैं। 4500 लीटर की पांच, ढाई हजार लीटर क्षमता वाली दो और 450 ये 750 लीटर के तीन छोटी समेत कुल 10 वाहन हैं। इसके अलावा एक वाटरमिस्ड, 10 पंप व एक 40 लीटर क्षमता की एक बुलेट हैं। कप्तानगंज, हाटा व कसया में स्टेशन का निर्माण कार्य चल रहा है। अग्निशमन विभाग के पास कुल 10 अग्निशमन वाहन को चलाने के लिए केवल चार चालक हैं। यही नहीं कुल 73 फायर मैन के सापेक्ष जिले में केवल 37 फायरमैन तैनात किए गए हैं। यह संख्या जरूरत के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। मानक के मुताबिक एक लाख की आबादी पर एक फायर स्टेशन होना चाहिए। इसके चलते यदि ग्रामीण क्षेत्र में कहीं भी आग लगती है तो दमकल को पहुंचने में कम से कम आधा घंटा और अधिकतम एक घंटा लगता है। जब तक दमकल मौके पर पहुंचती है, तब तक सब जलकर राख हो जाता है। कई बार तो अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ता है, जबकि उनका कोई दोष नहीं होता है। जिले में जब भी कोई कार्यक्रम या वीवीआईपी मूवमेंट होता है तो अग्रिशमन विभाग की मुश्किल बढ़ जाती है।