कार्तिक पूर्णिमा पर बांसी नदी में डुबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद
पडरौना। कार्तिक पूर्णिमा पर बुधवार को लोगों ने बांसी नदी में स्नान किया। स्नान करने के बाद दान-पुण्य किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मंदिरों में दर्शन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। नदी किनारे श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ उमड़ी कि प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्था कमजोर पड़ गई और धक्का-मुक्की के बीच डुबकी लगानी पड़ी। मंगलवार की देर रात से शुरू हुआ स्नान बुधवार को दोपहर तक चलता रहा। बांसी मेले के बारे में मान्यता है कि सौ काशी न एक बांसी, अर्थात सौ बार काशी जाकर गंगा नदी में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह बांसी नदी में एक बार स्नान करने से मिल जाता है। कहा जाता है कि जनकपुर से लौटते समय भगवान राम ने इस नदी किनारे रात्रि विश्राम किया था। हर साल कार्तिक पूर्णिमा को यहां उत्तर प्रदेश और बिहार से बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान-दान करने आते हैं।
इस बार भी मंगलवार की रात 10 बजे एसडीएम और सीओ हालात संभालने पहुंचे। बांसी नदी घाट और आसपास की सड़कों पर इतनी भीड़ हो गई कि प्रशासन की तैयारी लड़खड़ा गई। पुलिस बल भी कम पड़ गया। स्थिति बिगड़ती देख किसी ने उच्चाधिकारियों को सूचना दी। एक घंटे बाद एसडीएम, सीओ और कोतवाल मौके पर पहुंचे और हालात को नियंत्रण में लिया।
सेवरही के शिवाघाट पर उमड़े श्रद्धालु, की पूजा-अर्चना
तमकुहीरोड संवाद के अनुसार सेवरही क्षेत्र में बुधवार को कार्तिक पूर्णिमा के स्नान पर्व पर हजारों श्रद्धालुओं ने बांसी व गंडक नदी में आस्था की डुबकी लगाई और दीपदान व गौदान कर दानपुण्य किया। कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर बुधवार को हजारों श्रद्धालुओ ने सेवरही क्षेत्र में शिवाघाट, दमकला घाट, मलाही घाट, गोलाघाट, पिपराघाट सहित जवही दयाल, विरवट कोन्हवलिया, बाकखाश, बाघा चौर, नोनियापट्टी, अहिरौलीदान स्थित बांसी व गंडक नदी में आस्था की डुबकी लगाई ।