कुशीनगर। प्रदीप और रीना की शादी के बाद एक बेटी ने जन्म लिया, इसके बाद बेटे की चाह में दवा और दुआ पर पांच लाख से अधिक रुपये खर्च किया। इसके बाद पत्नी गर्भवती हुई। करीब सात साल बाद मंगलवार की रात को मेडिकल कॉलेज में नार्मल प्रसव से बेटे को जन्म दिया।
प्रदीप और रीना काफी खुश हुए पर यह खुशी ज्यादा देर नहीं रही। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से वार्ड से उनका बच्चा गायब हो गया। पुलिस की प्रथम दृष्टया जांच में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स व अन्य कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिली, जिसके बाद बुधवार देर रात चार पर केस दर्ज कर लिया गया।
नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के बलकुड़िया गांव के मनिया छापर टोला निवासी प्रदीप की पत्नी रीना का प्रसव मंगलवार की रात को मेडिकल कॉलेज में हुआ। प्रदीप ने बताया कि बेटे के लिए गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी और पटना ले जाकर पत्नी का इलाज कराया, पांच लाख से अधिक रुपये खर्च किया, इसके अलावा लोगों के कहने पर दुआ भी कराया। ईश्वर ने सुना और घर गुलजार हुआ पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही ने उसकी खुशी छीन ली।
प्रदीप ने बताया कि जन्म के कुछ देर बाद ही स्टाफ नर्सों ने आपस में बात कर बेटे को पुरानी बिल्डिंग में संचालित एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करा दिया। सुबह नौ बजे जब वह एसएनसीयू वार्ड में बेटे को देखने गया तो वार्मर पर उनका बेटा नहीं था। करीब तीन घंटे तक इधर-उधर स्टाफ नर्स उसे घुमाते रहे। इस पर उसने पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस की जांच में बच्चे के गायब होने में स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही मिली है क्योंकि भर्ती होने के सभी कागजात एसएनसीयू वार्ड में मौजूद हैं। इस घटना के बाद एसएनसीयू में भर्ती बाकी तीमारदारों को अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता सामने लगी है।