पडरौना। कुशीनगर के पशु तस्करों द्वारा गोरखपुर के पिपराइच थाना क्षेत्र में महुआचाफी की घटना को अंजाम देने के बाद सक्रिय हुई गोरखपुर जोन की पुलिस के रडार पर 10 से अधिक कुख्यात तस्कर थे। पुलिस ने लगातार इनको ट्रेस करने की कोशिश करते हुए इनके गांव में दबिश भी दी, लेकिन पुलिस की योजना पर तस्करों का नेटवर्क भारी पड़ा और पुलिस इनको पकड़ नहीं सकी है। सूत्रों के अनुसार इन दिनों यह तस्कर बिहार स्थित अपने ठिकानों पर जमे हैं। इन कुख्यात तस्करों का बिहार के गोपालगंज, सिवान और यूपी के कुशीनगर, गोरखपुर,देवरिया तक नेटवर्क फैला हुआ है बावजूद इसके पुलिस पशु तस्करों को नहीं पकड़ पाई। यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं गोरखपुर में पशु तस्करों के उपद्रव मचाने के बाद पुलिस ने दूसरे दिन घटना में शामिल एक लाख के इनामी पशु तस्कर रहीम को रामकोला पुलिस ने मुठभेड़ में गिरफ्तार लिया था। गोरखपुर में पशु तस्करों के उत्पात के बाद हुए युवक की मौत के बाद पचास से अधिक पुलिसकर्मियों को हटाने के साथ कुशीनगर के कुख्यात तस्करों की खोजबीन पुलिस ने शुरू की तो जिले के कुख्यात तस्कर रडार पर आए जिन्हें कई माह से पुलिस पहले भी खोज रही थी। पडरौना कोतवाली पुलिस ने बसहिया बनवीरपुर के रियाज उर्फ ननकी को पकड़ने के लिए उसके ठिकाने पर दबिश देते हुए रात भर पहरेदारी की, लेकिन कोई सुराख नहीं मिला। इसके अलावा पश्चिमी चंपारण क्षेत्र के धनहा क्षेत्र में अपना ठीकाना बनाया जवाहिर यादव जो सूत्रों के मुताबिक पडरौना के जटहा का मूल रूप से रहने वाला है, उसे भी पकड़ने के लिए उसके ठिकानों पर पुलिस ने छापेमारी की लेकिन वहां उसका भी सुराख हाथ नहीं लगा। ऐसे में संदेह है कि फिर से ये तस्कर अपने पुराने अंदाज में अपने लड़को के माध्यम से तस्करी को शुरू करा देंगे। इसके अलावा गोपालगंज का शब्बीर, मेराज की तलाश पुलिस कर रही है।
एएसपी निवेश कटियार ने कहा कि जो पशु तस्कर वांछित चल रहे हैं, उनको पुलिस गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रही है। पशु तस्करों का जो भी सक्रिय नेटवर्क है। उसको तोड़ने के लिए पुलिस कार्य कर रही है। बिहार पुलिस की भी जरूरत पड़ने पर मदद ली जा रही है।