अरनहवा गांव में लोगों के साथ बैठक करती पुलिस।स्रोत-सोशल मीडिया
पडरौना। सड़क हादसों पर रोक लगाने के लिए पुलिस प्रशासन ने पहल शुरू कर दी है। इसके तहत गांवों में चौपाल लगाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं सड़क परिवहन एवं यातायात विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में सड़क हादसों में कुशीनगर जिला टॉप-20 में 18वें स्थान पर है। इससे गंभीर तथ्य यह है कि जिले में सड़क हादसों में मरने वालों की सबसे बड़ी वजह सिर में गंभीर चोट (हेड इंजरी) बन रही है।
पुलिस के अनुसार इसकी मुख्य वजह यातायात नियमों का पालन नहीं करना और नशे में वाहन चलाना है। पुलिस के आंकड़े के अनुसार वर्ष 2025 में 761 सड़क हादसे हुए, जिसमें 463 लोग की मौत हो गई और 482 लोग घायल हुए। डेटा के मुताबिक शाम तीन बजे के बाद कुशीनगर की सड़कें सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हो रही हैं, जहां नशे में तेज रफ्तार, दोपहिया वाहन और सुरक्षा नियमों की अनदेखी सीधे मौत का कारण बन रहे हैं। सड़क परिवहन एवं यातायात विभाग द्वारा संकलित दुर्घटना विश्लेषण में सामने आया है कि जिले में दर्ज कुल घातक हादसों में अधिकांश मौतें हेड इंजरी से हुईं। मृतकों में 60 प्रतिशत से अधिक दोपहिया वाहन चालक हैं। इनमें बड़ी संख्या 18 से 35 वर्ष के युवाओं की है। शाम 3 बजे से रात 9 बजे के बीच हादसों की संख्या सबसे ज्यादा पाई गई। जिस समय बाजार, स्कूल छुट्टी, दफ्तरों से वापसी और हाईवे ट्रैफिक चरम पर होता है, उसी वक्त सड़कें सबसे असुरक्षित हो जाती हैं।