- दो स्वयंसेवी संगठनों ने विदेश मंत्रालय व म्यांमार दूतावास को भेजा ईमेल, पीड़ित उस्मान के भाई के मेल का विदेश मंत्रालय से आया जवाब
- कुशीनगर के दो युवक फंसे हैं म्यांमार में, जबरन साइबर अपराध कराने का है आरोप
पडरौना। म्यांमार में साइबर अपराधियों के शिकंजे में फंसे पडरौना के दो और बिहार के एक युवक की वतन वापसी की उम्मीद जगी है। इन युवकों की मदद के लिए दो स्वयंसेवी संगठनों ने विदेश मंत्रालय और दिल्ली में स्थित म्यांमार दूतावास को ईमेल भेजा था। विदेश मंत्रालय ने युवकों की वतन वापसी कराने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। वहीं, म्यांमार में फंसे उस्मान के भाई आमिर ने भी विदेश मंत्रालय को ईमेल भेजा था, आमिर को भी मामले का संज्ञान लिए जाने का जवाबी मेल मिला है।
म्यांमार में फंसे पडरौना के महाराणा प्रताप नगर, जंगल बेलवा के रहने वाले मोहम्मद उस्मान अंसारी मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी से वीडियो कॉल पर बातचीत में डरे-सहमे दिखे। बातचीत के दौरान कई बार उनकी आवाज भर्रा गई। उस्मान ने बताया कि वह पहले से शुगर और बीपी का मरीज है। लगातार तनाव और दवा न मिलने से हालत बिगड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने वहां मौजूद लोगों से दवा दिलाने की गुहार लगाई तो उन्हें धमकाया गया। उनके साथी मोहम्मद हसन रजा और बिहार के सीतामढ़ी निवासी अनुरंजन कुमार भी परेशान हैं।
अपनी तकलीफ बताते उस्मान रो पड़े। उन्होंने बताया कि, “मैंने कहा कि मेरी तबीयत खराब हो रही है, दवा दिलवा दीजिए... तो कहा गया कि चुपचाप काम करो, ज्यादा बोलोगे तो तीनों को पीटेंगे। ठीक से खाना तक नहीं मिल रहा है। घर से जो थोड़ा अचार और भूजा साथ लाए थे, उसी के सहारे कई रातें काटीं। अब वह भी खत्म हो गया है। अब समझ नहीं आता क्या खाएंगे... धीरे-धीरे उम्मीद खत्म हो रही है...।”
उस्मान का कहना है कि उनसे सोशल मीडिया पर महिलाओं के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनवाकर सोशल मीडिया पर लोगों को फांसने, क्रिप्टोकरेंसी जमा कराने और ऑनलाइन ठगी के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इन्कार पर पहले पासपोर्ट छीन लिया गया और अब डरा-धमकाकर काम कराया जा रहा है। वहीं, परिवार के लोग भी चिंता में डूबे हुए हैं। घर में फोन की घंटी बजते ही खौफ बढ़ जाता है। मां-बाप पूरी रात जागकर बेटे की आवाज सुनने का इंतजार कर रहे हैं। उस्मान की मां रेहाना का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि बेटे की आवाज सुनते ही दिल कांपने लगता है। उन्हें डर है कि अगर जल्द मदद नहीं पहुंची तो कहीं बहुत देर न हो जाए।
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विदेश मंत्रालय ने भारतीय दूतावास को भेजा मामला
प्रवासी भारतीय मदद समूह निस्वार्थ के माध्यम से म्यांमार में फंसे युवकों के मामले में विदेश मंत्रालय के मदद पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। संगठन के उपाध्यक्ष छोटेलाल यादव ने बताया कि विदेश मंत्रालय से मिले जवाबी ईमेल के अनुसार मामले को संबंधित भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है। मेल में यह भी कहा गया है कि मामले की स्थिति मदद पोर्टल पर ट्रैक की जा सकती है। वहीं, मदद फाउंडेशन गोरखपुर के अध्यक्ष राजेश मणि ने बताया कि उन्होंने विदेश मंत्रालय, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय के मदद फाउंडेशन और दिल्ली में स्थित म्यांमार के दूतावास को ईमेल करके युवकों वतन वापसी करने की सिफारिश की है। उस्मान के भाई मोहम्मद आमिर ने बताया कि उन्होंने विदेश मंत्रालय को जो मेल किया था, उसके जवाब में बताया गया है कि मामले का संज्ञान लिया गया है।
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डीएम साहब और विदेश मंत्री जी! हमें बचा लीजिए
मंगलवार को उस्मान ने वायसनोट और वीडियो बनाकर कुशीनगर के लोकल व्हाटसएप ग्रुप में भेजा जिसमें डीएम महेंद्र सिंह तंवर और विदेश मंत्री से मदद की गुहार लगाई गई है। कहा है कि, उन्हें भरोसा है कि भारत सरकार उनकी सुरक्षित वतन वापस कराएगी। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर कहता दिख रहा है कि “डीएम साहब... विदेश मंत्री जी... हमें किसी तरह भारत बुला लीजिए... यहां हालात बहुत खराब हैं...।” परिवार वालों का कहना है कि युवकों की आवाज में डर साफ महसूस हो रहा है, इसके बावजूद वे आखिरी उम्मीद भारत सरकार से लगाए हुए हैं।
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छिपकर वाईफाई जोड़ते हैं...डर रहता है कहीं फोन भी न छीन लें
म्यांमार में फंसे युवकों ने बताया कि वहां हर समय निगरानी रहती है। सामान्य मोबाइल नेटवर्क ठीक से काम नहीं करता और कई बार घंटों फोन बंद रहता है। युवकों के मुताबिक, जब कंपनी के लोग आसपास नहीं होते हैं तभी वे छिपकर वाईफाई कनेक्ट कर घरवालों को वीडियो और लोकेशन भेजने का प्रयास करते हैं। युवकों ने कहा कि उन्हें हर वक्त डर बना रहता है कि जैसे उनका पासपोर्ट छीन लिया गया, कहीं वैसे ही मोबाइल फोन भी न छीन लिया जाए। इसलिए जल्दी-जल्दी बात करते हैं और कई बार कॉल अचानक काट देते हैं। परिवार वालों का कहना है कि वीडियो कॉल के दौरान युवकों के चेहरे पर डर साफ दिखाई देता है, मानो कोई पीछे खड़ा होकर निगरानी कर रहा हो।
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भेजी लाइव लोकेशन, दिल्ली से करीब 3700 किमी दूर हैं युवक
म्यांमार में फंसे युवकों ने व्हाट्सएप के जरिये अपनी लाइव और करंट लोकेशन भी शेयर की है। भेजी गई लोकेशन म्यांमार-थाईलैंड सीमा के पास पहाड़ी और जंगल वाले इलाके की ओर इशारा कर रही है। युवकों ने बताया कि उन्हें आबादी से काफी दूर रखा गया है, जहां सामान्य सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। व्हाट्सएप लोकेशन के अनुसार वे दिल्ली से करीब 3700 किलोमीटर दूर फंसे हैं। परिवार वालों का कहना है कि जब उन्होंने मैप पर वह जगह देखी तो उनके होश उड़ गए। उन्हें पहली बार एहसास हुआ कि युवक सचमुच किसी सुनसान और खतरनाक पहाड़ी इलाके में कैद जैसे हालात में हैं। मैप में भी समतल और आबादी से बिल्कुल अलग लोकेशन दिख रही है।