जिसके अगवा होने की थी सूचना, वह ठगी का आरोपित निकला
पडरौना। कसया की एक फाइनेंस कंपनी में कार्य कर चुके जिस युवक के मंगलवार की रात अपहरण की चर्चा जोरों पर थी, वह खुद ही एक ठग निकला। पुलिस की जांच में पता चला कि बिहार के बेल्दौर कस्बे में फाइनेंस कंपनी खोलकर 30 हजार रुपये की किस्त और तीन हजार रुपये जमा कराने के नाम पर लेकर फरार था।
उसने इन लोगों को अपनी फाइनेंस कंपनी में नौकरी देने का झांसा दिया था। जब इस बात का अंदेशा हुआ तो ठगी के शिकार लोगों ने उसे विश्वास में लेकर बेल्दौर बुलाया और पकड़ लिया। हालांकि रुपये लेकर आने की बात कहकर वह फिर से भाग गया।
पुलिस के मुताबिक, देवरिया जिले के भलुअनी का निवासी सुरेश यादव की तरफ से बताया गया था कि मंगलवार की रात उनके बेटे को प्रिंस यादव को बेगूसराय में रोककर पांच लाख रुपये फिरौती मांगी गई है। पुलिस की जांच पड़ताल में पता चला कि युवक कसया की जिस फाइनेंस कंपनी में कार्य करता था, वहां कार्य एक महीना पहले ही छोड़ चुका है। उसके मैनेजर भी कोई और हैं। जबकि उसी कंपनी के नाम पर बेल्दौर में शाखा खोला था, जहां देवरिया के ही एक युवक को शाखा प्रबंधक बनाकर उसकी मदद से लोगों को फाइनेंस कंपनी में जोड़ता था।
उनसे 30 हजार रुपये की किस्त और तीन हजार रुपये बीमा के लेकर अपनी फाइनेंस कंपनी में नौकरी देने का झांसा देते थे। कई लोगों से रुपये ऐंठ लिए थे। नौकरी या रुपये नहीं मिलने पर लोगों ने और कुछ युवकों से इस कार्य के लिए रकम दिलाने के लिए बुलाया और फिर प्रिंस यादव को बिहार के खगड़िया जिले के बेल्दौर प्रखंड में बुलाकर पकड़ लिया। हालांकि प्रिंस उन्हें भी यह कहकर चकमा देकर भाग निकला कि रकम लाने जा रहा है।
एसपी विनोद कुमार सिंह ने इस घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि न तो युवक इस जिले का निवासी है और न ही घटना यहां की है। फिर भी एक माह पहले कार्यक्षेत्र यहां होने तथा उसके पिता की तरफ से तहरीर मिलने पर जांच की गई तो अपहरण का मामला गलत निकला। जांच में युवक ही ठगी में संलिप्त पाया गया। उसका पता लगाया जा रहा है।