कसया। नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के सभागार में प्रांतीय शिशु वाटिका प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें गुणवत्तापूर्ण और गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर दिया गया। मुख्य अतिथि उदित नारायण महाविद्यालय पडरौना की प्राचार्या डॉ. ममता मणि त्रिपाठी ने कहा कि क्रिया आधारित शिक्षण पद्धति से बच्चों की सीखने और समझने की क्षमता बढ़ती है। इससे छात्र विषय को केवल याद नहीं करते, बल्कि व्नावहारिक रूप से भी समझते हैं। वर्तमान में शिक्षा को रोचक, सरल और प्रयोगात्मक बनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित होनी चाहिए, ताकि शिक्षकों की दक्षता और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार हो सके। शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कक्षा में पढ़ाने से पहले विषय की पूरी तैयारी और पाठ्यक्रम का गहन अध्ययन जरूरी है। इससे शिक्षक आत्मविश्वास के साथ पढ़ा सकेंगे और छात्र विषय को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। कार्यशाला में शिक्षण पद्धति, बाल विकास और विद्यालयी गतिविधियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं और आचार्य मौजूद रहे।