कुशीनगर। तराई की जमीन से उठती नमी, दिन में हवा की बेहद कम गति और ऊपर बनी इनवर्जन परत ने कुशीनगर-गोरखपुर इलाके को पूर्वांचल का सबसे संवेदनशील ‘कोल्ड पॉकेट’ बना दिया है। गांव से लेकर कसया, हाटा और तमकुहीराज के बाजारों तक ठंड अब सीधे जीवनशैली पर असर कर रही है। जिले में इस समय दिन का तापमान 16-17 डिग्री और रात का न्यूनतम 8-9 डिग्री पर सिमट चुका है लेकिन ठंड का असर पूरे दिन बना हुआ है। मौसम विज्ञानी बता रहे हैं कि इसकी वजह सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि तराई का भूगोल, ठहरी हवा, जमीन से उठती नमी और आसपास के जिलों से आती ठंडी हवा मिलकर कुशीनगर को पूर्वांचल का सबसे ठंडा और सबसे संवेदनशील क्षेत्र बना चुके हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया की मौसम विज्ञानी श्रुति वी सिंह ने बताया कि प्रशांत महासागर में सतही तापमान सामान्य से कम रहने के कारण उत्तर भारत में ठंडी हवाओं और नमी का पैटर्न बदल गया है। कुशीनगर जैसे तराई क्षेत्रों में इसका असर साफ दिख रहा है। सुबह 9-10 बजे तक कोहरा-धुंध छाया रहा।
विशेषज्ञ इसे लो-विंड इनवर्जन ट्रैप मान रहे हैं, जिसमें ठंडी हवा नीचे फंस जाती है और बाहर निकलने का रास्ता नहीं पाती। हालांकि बृहस्पतिवार रात हल्की हवा चलने से कोहरे की परत कुछ हद तक टूटी, लेकिन इसके साथ ही गलन और चुभन बढ़ गई, जिससे ठंड का अहसास और तीखा हो गया।
मौसम विज्ञानी श्रुति वी सिंह ने बताया कि तराई और समतल भूभाग, नदियां, पोखरे और खेतों से लगातार नमी, दिन में हवा की गति लगभग, कम इनवर्जन लेयर, जिससे ठंड हवा ऊपर नहीं पहुंच पा रही है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिन भी कुशीनगर-गोरखपुर बेल्ट के लिए संवेदनशील रह सकते हैं। अगर हवा की रफ्तार स्थायी रूप से नहीं बढ़ी तो कोहरा घटने के बावजूद गलन और शीत दिवस और गहराने की आशंका है।